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रोशनी अपनों से है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’
देवास (मध्यप्रदेश)
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अंधियारे में रोशनी चिरागों से होती है,
ज़िंदगी में रोशनी सच्चे अपनों से होती है।

माना झूठा, फरेबी, भ्रष्ट, बेईमान है संसार,
पर कुछ तो सच्चे-अच्छे दोस्त भी हैं यार।

बुझा दो उन चिरागों को,
जो स्वार्थ, द्वेष और कपट से जलते हैं।

जोत से जोत जलाओ उन चिरागों की,
जो सद्भावना, वफादारी, कर्तव्य के तेल से जलते हैं ‘केसर’॥