ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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शिव जी भोले भंडारी हैं,
इनकी तो लीला न्यारी है
भटके को वो राह दिखाते,
जिसने सब-कुछ वारी है।
जो भी मांगे दिल से कुछ,
उनकी वे प्यास बुझाते हैं
उनके माथे पर चंदा विराजे,
जटा में गंगा जी समायी है।
गले में नाग करे फुंकार,
वो डमरू त्रिशूल धारी है
कानों में सजे बिच्छू कुंडल,
वो कहलाते औघड़दानी है।
लपेटे तन पर मृगछाला,
नंदी उनकी प्रिय सवारी है
संतानें कौशिकी गणेश कार्तिक,
पत्नी पार्वती प्राण सुकुमारी है।
सावन में होती पूजा विशेष फूल,
धतुरा बेलपत्र जलाभिषेक प्यारा है
शिव जी हमारे दया के सागर,
वे सबके दु:ख-दरिद्र मिटाते हैं।
शिव जी की महिमा न्यारी है,
जग की खातिर नीलकंठ धारी है।
शिव जी भोले भंडारी हैं,
उनकी तो लीला न्यारी है॥