बबिता कुमावत
सीकर (राजस्थान)
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मेरी असली प्रेरणा…
मेरी असली प्रेरणा
मेरे पिता हैं,
जिन्होंने मुझे केवल रास्ते नहीं दिखाए
बल्कि हर रास्ते पर चलने का साहस दिया।
उन्होंने मुझे यह नहीं सिखाया,
कि जीवन हमेशा आसान होगा-
उन्होंने सिखाया कि कठिन रास्तों पर भी,
अपने कदमों को स्थिर रखना चाहिए।
जब मैं गिरने से डरती थी,
उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर नहीं,
मुझ पर विश्वास करके
मुझे आगे बढ़ना सिखाया।
उनकी बातें हमेशा लंबी नहीं थीं,
लेकिन हर शब्द में
एक अनुभव छिपा रहता था,
जो समय के साथ समझ आने लगा।
उन्होंने अपने हिस्से की थकान
अक्सर चेहरे से दूर रखी,
ताकि हमारी मुस्कान
किसी चिंता से कम न हो जाए।
उन्होंने अपनी कई इच्छाओं को
चुपचाप पीछे छोड़ दिया,
ताकि हमारे सपनों को
आगे बढ़ने की पूरी जगह मिल सके।
उनके हाथों की मेहनत में
एक परिवार की जिम्मेदारी दिखाई देती है,
और उनकी आँखों में
हमारे भविष्य के लिए अनगिनत उम्मीदें।
आज जब जीवन की राहों को
थोड़ा-थोड़ा समझने लगी हूँ,
तब महसूस होता है कि
पिता केवल एक रिश्ता नहीं होते,
वे जीवन की सबसे मजबूत सीख होते हैं।
‘पितृत्व दिवस’ पर,
मैं सिर्फ धन्यवाद नहीं कहना चाहती,
मैं यह कहना चाहती हूँ कि
अगर मेरे व्यक्तित्व में कोई अच्छाई है,
अगर मेरे भीतर आगे बढ़ने का साहस है,
तो उसमें सबसे बड़ा योगदान
मेरे पिता का है।
वे मेरे जीवन का सहारा हैं,
मेरे विश्वास की शक्ति हैं।
और हमेशा रहेंगे,
मेरी असली प्रेरणा॥