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मौसम चुनाव का आया

मालती मिश्रा ‘मयंती’
दिल्ली
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नेता भए कृपाण दुधारी,
चारों ओर भरम है भारी।

पाँच बरस तक सुध नहिं आई,
आज अचानक प्रीत लुटाई।

नाना रूप धरे बहुतेरे,
लगे लगाने घर-घर फेरे।

जब मौसम चुनाव का आया,
पल-पल नया रंग दिखलायाl

जैसा जँचे रूप वो धारा,
शरमाया गिरगिट बेचारा।

राजनीति का खेल निराला,
मुजरिम बन जाता रखवाला।

सालों-साल जिसे था लूटा,
उसे दिखाते फिक्र ये झूठा।

नीति-नियम नहीं इनको भाता,
सभी विकृतियों के ये दाता।

कुर्सी की भूख बड़ी है भाई,
वोट पड़े हर शय में दिखाई।

गर्दभ को जो बाप बनाए,
वही आज नेता बन पाए।

छल-प्रपंच अरु घोर ढिठाई,
अब ये चहुँदिशी पड़े दिखाई।

बिगुल फूँक अब देश जगाया,
फिर मौसम चुनाव का आयाll

परिचय-मालती मिश्रा का साहित्यिक उपनाम ‘मयंती’ है। ३० अक्टूबर १९७७ को उत्तर प्रदेश केसंत कबीर नगर में जन्मीं हैं। वर्तमान में दिल्ली में बसी हुई हैं। मालती मिश्रा की शिक्षा-स्नातकोत्तर (हिन्दी)और कार्यक्षेत्र-अध्यापन का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप साहित्य सेवा में सक्रिय हैं तो लेखन विधा-काव्य(छंदमुक्त, छंदाधारित),कहानी और लेख है।भाषा ज्ञान-हिन्दी तथा अंग्रेजी का है। २ एकल पुस्तकें-अन्तर्ध्वनि (काव्य संग्रह) और इंतजार (कहानी संग्रह) प्रकाशित है तो ३ साझा संग्रह में भी रचना है। कई पत्र-पत्रिकाओं में काव्य व लेख प्रकाशित होते रहते हैं। ब्लॉग पर भी लिखते हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा,हिन्दी भाषा का प्रसार तथा नारी जागरूकता है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-अन्तर्मन से स्वतः प्रेरित होना है।विशेषज्ञता-कहानी लेखन में है तो रुचि-पठन-पाठन में है।