इंदौर (मप्र)।
प्रेम और स्नेह के प्रतीक फरवरी माह के गुलाबी माहौल के बीच वामा साहित्य मंच द्वारा खूबसूरत और भावनात्मक मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। विषय बेहद अनूठा था ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’, जिसने डिजिटल युग की भागदौड़ के बीच चिट्ठियों की पुरानी और नाजुक परम्परा को जीवंत कर दिया।
इसका विधिवत प्रारंभ आशीष होरा द्वारा मधुर सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मंच की अध्यक्ष ज्योति जैन ने स्वागत उद्बोधन में सभी वामा सखियों को अपनी शक्ति बताया और प्रेम की परिभाषा देते हुए कहा कि मरने के बाद तो सभी कांधा देते हैं, प्रेम वही जो जीते जी कांधा दे।
मुख्य अतिथि इंदौर आकाशवाणी केंद्र के वरिष्ठ ब्रह्मप्रकाश चतुर्वेदी रहे, जिन्होंने सखियों की रचनाओं की जमकर सराहना की और कहा कि प्रेम स्त्री-पुरुष का समांतर भाव है, और अपने शब्दों को जब निश्चल भाव से पत्र में उतार देते हैं, वही प्रेम है। उन्होंने अपनी प्रेयसी के लिए लिखी पंक्तियां भी सुनाईं।
मंच की प्रचार सचिव सपना साहू ‘स्वप्निल’ ने बताया कि गोष्ठी में सखियों ने अपने-अपने घरों पर बैठकर प्रेम और संवेदनाओं से भीगी हुई जो प्रेम-पातियाँ लिखी थीं, उनका वाचन किया। शब्दों के माध्यम से रचे गए इन शब्द चित्रों ने सभी को भाव-विभोर कर दिया। इसमें किसलय पंचोली ने पति के साथ को ४३ वर्ष पुरानी चाँदनी रात के रूप में वर्णित किया, आशा मानधन्या ने पुराने प्रेमपत्र का वाचन किया, तो वंदना पुणताम्बेकर ने पहली बार प्रेमपत्र लिखा। डाॅ. रेखा मण्डलोई, अंजना सक्सेना, नेहा जैन, उषा गुप्ता, नीरजा जैन और रजनी जैन ने भी भावुक पत्र लिखा।
आयोजन में संगीतमय प्रस्तुति भी हुईं। प्रीति दुबे ने भ्रमर गीत सुनाया, इंदु पाराशर ने चिट्ठी के इतिहास पर कविता सुनाई।
गोष्ठी का संचालन रश्मि चौधरी ने किया। कुशल संयोजन डॉ. शोभा प्रजापति द्वारा किया गया। आभार अमर कौर चढ्ढा ने व्यक्त किया।