पटना (बिहार)।
कम शब्दों में लयात्मकता और काव्य-बिम्ब के माध्यम से बड़ी बात कह जाना सार्थक कविता की पहचान है। आज सपाट कविता पाठकों से दूर होती जा रही है।
यह विचार कवि सिद्धेश्वर ने ‘अवसर कविता सप्ताह’ के समापन अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में व्यक्त किए। आपने संयोजक के नाते भारतीय साहित्यकार युवा परिषद द्वारा आयोजित उक्त सम्मेलन में चर्चित कवियित्री अनिता मिश्रा ‘सिद्धि’ की लेखन रचनात्मकता पर चर्चा की।
प्रथम सप्ताह की अध्यक्ष शायर शमा कौसर ‘शमा’ ने कहा कि आजाद गज़ल की अपनी विशेषता है, किंतु, निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली रचना को ग़ज़ल की बजाय आजाद ग़ज़ल कहना अधिक उचित है। दूसरे सप्ताह की अध्यक्ष अनिता मिश्रा ने अपनी ३ कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया। दूसरे सत्र में कई रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। कार्यकम अध्यक्ष ने इनकी समीक्षा की।
डॉ. अनुज प्रभात ने आभार का दायित्व निभाया।