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हँसते-हँसते फाँसी को गले लगाया

राधा गोयल
नई दिल्ली
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‘शहीद दिवस विशेष’ (२३ मार्च)…

‘२३ मार्च’ इस दिन भारत के ३ सपूतों शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश के लिए हँसते-हँसते फाँसी की सजा को गले लगा लिया था। उनकी शहादत को देश का हर नागरिक सच्चे दिल से नमन करता है।
भारत में शहीदों के सम्मान और देश के लिए दिए गए उनके बलिदान को याद करने के लिए हर साल ‘शहीद दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस पर भारत के गौरव, शान और आजादी के लिए लड़ने वाले भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु, सुखदेव को श्रद्धांजलि दी जाती है। शहीद दिवस देश के लिए बहुत खास और भावुक दिन होता है।
कम उम्र में इन वीरों ने देश के आजादी की लड़ाई लड़ी और अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसी के साथ भारतीयों के लिए भगत सिंह, शिवराम राजगुरु, सुखदेव प्रेरणा के स्रोत बने हैं। उनकी क्रांति और जोश आज युवाओं की रगों में बहता है। यही कारण है, कि इन तीनों महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत में हर साल २३ मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए उन्होंने पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे। बम खाली जगह में फेंके गए थे, जिनमें कोई ज्वलनशील पदार्थ नहीं था। केवल बहरों को अपनी आवाज सुनाने के लिए ऐसा किया गया था। बम फेंकने के बाद वे भागे नहीं। १४ फरवरी को उन्हें फाँसी की सजा सुना दी गई। २३ मार्च यह वही दिन है, जब अंग्रेजी सरकार ने देश के इन ३ वीर सपूतों को फाँसी दी थी।

दुखद बात है कि इन तीनों को अपने परिजनों से आखिरी बार मिलने का भी मौका नहीं मिला। अंग्रेजों ने अधजली लाशों को नदी में बहा दिया। लोगों ने उनकी देह को बाहर निकाला और अन्तिम संस्कार किया। अंग्रेजों के इस कृत्य की सभी ने बेहद निन्दा की और ये तीनों क्रान्तिकारी जनता में बेहद प्रसिद्ध होकर सबके दिलों में एक चिंगारी सुलगा गए।