ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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‘हनुमान जयंती’ विशेष….
जय-जय वीर बजरंग बली का नारा है,
संकट मोचन हनुमान हम सबका सहारा है।
भूत-प्रेत रोग, शोक, दोष सब दूर भगाए,
जो भी भक्त उन्हें जब दिल से बुलाए।
पवनपुत्र हनुमान संकटमोचन नाम जिनका,
श्रीराम-श्रीराम मन ही मन जपते वो इतना।
संकट में लड़ने को साहस है तब मिलता,
कोई भी भक्त जब इनका नाम है जपता।
चैत्र पूर्णिमा जन्म हुआ हनुमानजी का,
प्रथम जन्मोत्सव मनाते हनुमानजी का।
द्वितीय जयंती मनाते कार्तिक चर्तुदशी में,
देवताओं से अनेक शक्तियाँ मिली चर्तुदशी में।
दोनों तिथियाँ शक्ति औेर भक्ति हनुमान जी की,
हम सब सम्मान में मनाते जयंती हनुमान जी की।
अष्ट सिद्धी, नौ निधियों के दाता हैं हनुमान,
प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त हमारे हनुमान।
आजीवन रहे ब्रह्मचारी, हनुमान बावजूद इसके,
लंका दहन में पसीने से जन्में मकरध्वज इनके।
बचपन में हनुमान ने सूरज को ही निगल लिया,
लाल-लाल बड़े फल सूरज को ही समझ लिया।
समस्त ब्रम्हांड में घोर अंधकार जब छाया,
माता अंजनी, सभी देवता, हर जन घबराया।
देवता सभी मिलकर हनुमान को समझाए,
तब जाकर हनुमान सूरज को बाहर लाए।
श्रीराम-श्रीराम, सीता-राम का वो नारा लगाए,
श्रीराम के रटने में ही हनुमान जी को सुख आए॥