हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?
वैश्विक स्तर पर जो युद्ध चल रहा है, उसे देखते हुए तीसरे ‘विश्व युद्ध’ का खतरा मंडरा रहा है। अमन, चैन सौहार्द और भाईचारे से मानवीय मूल्यों का स्तर बना रहता है, पर हिंसा मार-काट के बीच ‘युद्ध’ ठीक नहीं कहा जा सकता है। इस आधुनिक युग में पूरी दुनिया अपने- आपको आगे बढ़ाने में लगी हुई है, लेकिन विश्व के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका का ईरान देश के साथ युद्ध हो रहा है। स्थिति इतनी खतरनाक हो गई है, कि अब तो ‘परमाणु युद्ध’ का खतरा भी मंडरा रहा है। इसलिए समय के हिसाब से युद्ध नहीं विश्व में शान्ति जरूरी है। युद्ध व शान्ति के मायने अलग-अलग जरुर है, पर अपनी महत्वाकांक्षा दिखाने की लालसा में अपनी ताकत का शक्ति प्रदर्शन युद्ध ही है, जिसके कारण मानवीय सभ्यता, अर्थव्यवस्था और जीवन-शैली पीड़ादायक व और जनमानस के लिए नुकसानदायक है। युद्ध की पटकथा दुष्प्रभाव प्रकट करती है, तो भी मानवीय पहलू के लिए युद्ध अपने हिसाब से तानाशाही प्रवृत्ति या अपने-आपको श्रेष्ठ बताने में या फिर दूसरों का हक़ छीन कर अपनी ताकत बढ़ाने में युद्ध लड़ा जा रहा है। कभी कहा जाता था, कि बुराई पर अच्छाई हेतु युद्ध लड़ा जाता रहा है, लेकिन मानवीय सरोकार भाव से देखें तो शान्ति हमारे लिए ही नहीं; बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए अहिंसात्मक वातावरण व सकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक मानी गई है। युद्ध और शांति अपने-अपने राष्ट्र के हिसाब से सही व गलत कही जा सकती है, लेकिन शक्तिशाली हथियारों के इस जंगल में बम, गोला, बारूद ही नहीं अब तो अत्याधुनिक हथियारों में सभी देश धन ख़र्च कर रहे हैं। इसमें कोई भी पीछे नहीं रहता है, क्योंकि सुरक्षा का सवाल है। कोई हार नहीं मानता है। वर्तमान में ख़तरों की इस डगर में हर देश युद्ध में अच्छा प्रदर्शन करते हुए लड़ाई लड़ना चाह रहा है। अब कोई किसी से कम नहीं है, इसलिए पिछले कुछ सालों से कई देशों में युद्ध का आगाज हो चुका है, मगर सामाजिक स्तर पर मानवता को बचाने हेतु शांति बहुत जरूरी है।
वर्तमान समय में हर देश की अपनी सामाजिक जिम्मेदारी है, और नैतिक मूल्य हैं, जिनको देखते हुए युद्ध व शान्ति दोनों के प्रति हमें बहुत ही सजग रहना होगा। युद्ध के कारण जो परेशानी विश्व में हो रही है, वो देखते हुए मानवता के लिए युद्ध ठीक नहीं है।