हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)…
हर समय
जो साथ रहती है,
जो अपने बच्चों के लिए
सब कुछ सहती है वो ‘माँ’ है।
ममता का बंधन
जो कभी खत्म नहीं होता,
हम चाहे कितने बड़े हो जाएं,
पर माँ के लिए हम बच्चे ही रहते हैं।
नौ महीने ‘कोख’ में रख
जिसने अपने जीवन का सब-कुछ दिया,
वह ममतामयी माँ भगवान से बढ़ कर होती है,
क्योंकि माँ तो माँ ही होती है।
माँ इस दुनिया से जाने के बाद भी,
याद बहुत आती है माँ
जब हम दुनिया में दुःख-दर्द में,
रहते हैं तो उसे ही पुकारते।
माँ का क़र्ज़ नहीं चुका पाते,
क्योंकि वह तो ‘माँ’ ही है॥