डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती
बिलासपुर (छतीसगढ़)
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तुम इतनी जल्दी कैसे
सो जाते हो ?
जब मैं तुम्हें पढ़ती हूँ,
समझती हूँ, लिखती हूँ।
तुम इतनी जल्दी कैसे
सो जाते हो ?
जब मैं तुमसे बातें करती हूँ,
बातों में बहुत कुछ इज़हार करती हूँ।
तुम इतनी जल्दी कैसे
सो जाते हो ?
जब मैं इस अजनबी शहर में,
कोसों दूर तुम्हारी यादों के साथ चलती हूँ।
तुम इतनी जल्दी कैसे
सो जाते हो ?
जब मैं घर पर स्वादिष्ट रसोई बनाती हूँ,
हर कोने में प्यार की खुशबू फैलाती हूँ।
तुम इतनी जल्दी कैसे
सो जाते हो ?
जब रात भर मैं तुम्हारे सपने बुनती हूँ,
उन मीठे सपनों में प्रेम गीत सुनती हूँ॥