ममता साहू
कांकेर (छत्तीसगढ़)
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कहीं ये हो न जाए,
कहीं वो हो न जाए
ऐसा सोच कर कभी,
जीना न भूल जाएं।
जैसा अपने मन में आए,
वैसा ही करते जा जाएं
दु:ख-दर्द को भूलकर,
खुल के मुस्कुराएं।
जीवन मिलता नहीं दुबारा,
सत्य राह पर चलते जाएं
अपनों के हर गिले-शिकवे,
मन से अब दूर भगाएं।
आपस में सब बाँटें प्यार,
एक-दूजे को अपनाएं
रिश्ते होते कच्ची डोरी,
विश्वास से मजबूत बनाएं।
निराशा के घोर तम में,
कहीं कोई खो ना जाए।
आशाओं के दीप जलाकर,
चलो जीवन को सजाएं॥