बबिता कुमावत
सीकर (राजस्थान)
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हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)…
बच्चे केवल छोटे हाथ नहीं होते,
वे समय की हथेली पर लिखे हुए
आने वाले कल के हस्ताक्षर होते हैं।
उनकी आँखों में चमकते हैं
वे सपने
जिन्हें अभी शब्द नहीं मिले,
पर जो एक दिन
समाज और राष्ट्र की दिशा तय करेंगे।
जब कोई बच्चा
पहली बार अक्षर पहचानता है,
तब केवल उसका ज्ञान नहीं बढ़ता
एक नई संभावना जन्म लेती है।
उनकी हँसी में
जीवन का सबसे निर्मल संगीत होता है,
जो थके हुए मन में भी
उम्मीद के दीप जला देता है।
वे प्रश्न पूछते हैं,
बार-बार पूछते हैं
और हमें याद दिलाते हैं,
कि जिज्ञासा ही विकास का पहला कदम है।
उनकी छोटी-सी उड़ान में,
अनंत आकाश की कल्पना छिपी होती है,
उनके हर प्रयास में
एक नए युग की आहट सुनाई देती है।
वे हमारी ताकत हैं,
क्योंकि उनके लिए ही
हम संघर्ष करते हैं,
बेहतर समाज का स्वप्न देखते हैं,
और अपने आज को
उनके कल के लिए सँवारते हैं।
वे हमारी प्रेरणा हैं,
क्योंकि गिरकर उठना
हम उनसे सीखते हैं,
हारकर मुस्कुराना
हम उनसे सीखते हैं,
और हर दिन कुछ नया जानने की इच्छा भी
उन्हीं से पाते हैं।
यदि बच्चों के हाथों में
पुस्तक होगी,
तो भविष्य उजला होगा।
यदि उनके मन में
संस्कार होंगे,
तो समाज संवेदनशील होगा
यदि उन्हें अवसर मिलेंगे,
तो देश समृद्ध होगा
आओ, उनके सपनों को
सीमाओं में न बाँधें,
उन्हें विश्वास दें
उड़ने के लिए खुला आकाश दें।
क्योंकि बच्चे केवल
घरों की रौनक नहीं होते,
वे राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी होते हैं।
वे ही हमारा भविष्य हैं,
वे ही हमारी ताकत हैं,
वे ही हमारी प्रेरणा हैं।
और उन्हीं से जन्म लेता है,
एक सुंदर, मानवीय और आशावान कल॥