बबिता कुमावत
सीकर (राजस्थान)
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धरती के भगवान…
जब शरीर थक जाता है,
जब दर्द आँखों तक पहुँच जाता है
जब मन में डर घर बना लेता है,
तब एक चिकित्सक
उम्मीद की तरह सामने खड़ा दिखाई देता है।
उसके हाथों में केवल दवाइयाँ नहीं होतीं,
वहाँ अनुभव होता है
समझ होती है,
और एक शांत विश्वास होता है
वह दिन और रात का अंतर नहीं देखता,
कई बार अपनी नींद
अपना आराम,
और अपना समय पीछे छोड़ देता है।
किसी के लिए वह नया जीवन है,
किसी के लिए राहत का स्पर्श
और किसी के लिए,
अंधेरे समय में दिखाई देने वाली रोशनी।
इसीलिए लोग कहते हैं,
चिकित्सक केवल एक पेशा नहीं।
मानवता की सेवा का वह रूप है,
जिसे ‘धरती का भगवान’ कहा जाता है॥