सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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ये तिरंगा ये झंडा मेरी जान है
देश की मेरे ये ही तो पहचान है,
हम झुकाते सदा शीश सम्मान में
जन्मभूमि और झंडा मेरी शान है।
सबसे ऊपर कहानी कहे त्याग की
केसरी रंग वीरों की पहचान है,
जब भी आया है संकट वतन पर मेरे
हँसते-हँसते हुए वीर बलिदान हैं।
हो अमन सब तरफ़ विश्व परिवार है
सब रहें साथ मिलकर यही प्यार है,
प्रेम वर्षा करें, सब सुखी हों सदा
‘विश्व कुटुंबकम्’ का यही सार है।
है हरा रंग धरती की हरियाली का
देश में अन्न-जल और फल-फूल हो,
हर तरफ़ हो ख़ुशी पथ प्रगति का चढ़ें
देश की माटी सबका ये श्रृंगार हो।
बीच का चक्र कहता है अपनी कथा,
ये प्रगति का है पथ नहीं रुकता कभी।
बढ़ रहे हैं निरंतर वतन के लिए,
विश्व गुरु का पटल नहीं थमता नहीं॥