ममता सिंह ‘विशिष्ट’
धनबाद (झारखंड)
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माँ बाला त्रिपुर सुन्दरी जगदम्बा माता,
मंदिर गुम्बज स्वर्ण कलश आकर्षित करता।
माँ वैष्णो देवी जम्मू-कश्मीर के संस्थापक,
श्रीधर ओझा जी इसके कर्ता संस्थापक।
बिहार जिला लखीसराय के बड़हिया में,
माँ त्रिपुर सुंदरी जगदम्बा अवस्थित मंदिर में।
पालवंश काल में स्थापित बड़हिया ग्राम,
मूल निवासी बड़हिया के श्रीधर ओझा नाम।
ओझा जी तपस्या की जाकर हिमालय गुफा में,
त्रिपुर सुंदरी बाला की स्थापना श्रीधर ओझा ने।
पूरब में गंगा, पश्चिम में हरुहर नदी बहती थी,
बड़हिया में सैकड़ों विषधर सर्प प्रवास करते थे।
ग्रामीणों की मौत हो जाती थी सर्प दंश से,
निजात दिलाने खातिर देवी साधना की ओझा ने।
भक्त की पुकार सुन माँ त्रिपुर सुंदरी हुई प्रकट,
देवी ने उपाय सुझाए अकाल सर्प दंश किया कष्ट।
श्रीधर ओझा माँ को स्थापित किए बड़हिया में,
मंत्रोपचार करने लगे सभी पीड़ित का सर्प दंश से।
श्रीधर गंगा में मिट्टी खप्पर में जलती ज्वाला देखी,
तपोबल से माता को पहचान कर उनसे बात की।
मंदिर स्थित कुंआं का जल माँ कृपा से हुआ अमृत,
जल पिला मंत्रोच्चार से हुआ सर्पदंश रोगी जीवित।
मंदिर का गर्भ-गृह जमीन से बारह फुट ऊँचा,
माँ के नौ रूपों की प्रतिमा भक्तों की है आस्था।
दरबार में सच्चे मन से भक्त करते हैं आराधना,
कभी भी बेकार नहीं होती है उनकी ये साधना।
माँ जगदम्बा यहाँ पर पिंड स्वरूप हैं विराजती,
नाम महाकाली, महालक्ष्मी, और महासरस्वती।
करोड़ों रुपए की लागत से मंदिर के समीप बनी,
श्रीधर सेवाश्रम की खूबसूरती की छटा देखते बनी।
पुष्प श्रृंगार, सुबह-शाम आरती माता की दैनिक,
तीनों देवी की छटा होती है, स्वरूप अलौकिक।
वैष्णोदेवी माता के, जो श्रद्धालु ने नहीं किए दर्शन,
वे बड़हिया में माँ बाला त्रिपुर सुंदरी के करते दर्शन।
उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, रायपुर से श्रृद्धालु आते मिलने,
प्रसिद्धि उनकी इतनी फैली, विदेश से भी आते मिलने॥