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शतकोटि ‘सीता

डॉ. रीता कुमारी ‘गामी’
मधुबनी (बिहार)
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सुनो-सुनो शंखनाद हुआ है,
कुछ करने का एलान हुआ है,
युगपुरुष ने है हुंकार लगायी,
करने सजग धनुटंकार बजायी।

एक राम थे,एक थी सीता
एक ही राम हैं,शतकोटि है सीता!
प्रजावत्सल ने राजधर्म निभाया,
किया नहीं किसी को अनदेखा
एक-एक की होगी रक्षा,उसने,
सबके आगे लक्ष्मण-रेखा है खींची।

उठो! जागो!! जगवालों!
जी लो इस घड़ी को जी भरकर
अब सीता बनने की,हमारी बारी है,
त्रेता की भूल,फिर नहीं दुहरानी है।

धर-धर वेश आएगा रावण,
लाख जतन करेगा रावण
इस बार ‘सीता’ नहीं डरेगी,
लक्ष्मण-रेखा पार नहीं करेगी।

मन-मन में ‘मानस’-सार बसा है,
परिणाम हमें और तुम्हें पता है
अन्तर्मन की शक्ति तभी जगेगी,
पल-पल सीता राम-रमेगी।

जब तक ना लौटेंगे राम-लखन,
तब तक जानकी धैर्य धरेगी।
परिस्थितियों पर विजय पाकर,
पुरुषोत्तम निश्चय आएंगे एक दिन।
स्वागत में पलक-पांवड़े बिछाकर,
दिव्य ललाट पर विजय-तिलक करेगी॥

परिचय-डॉ. रीता कुमारी का साहित्यिक उपनाम ‘गामी’ है। आपका वर्तमान पता घोघरडीहा एवं स्थाई निवास जिला-मधुबनी (बिहार) में है। १८ फरवरी १९८३ को जन्मी रीता कुमारी को हिन्दी,मैथिली,अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। आपकी शिक्षा-नेट,पी-एच.डी.(हिन्दी),बी.एड. व एम.ए. (शिक्षा) में है। इनका कार्यक्षेत्र-अध्यापन है,जबकि सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत ग्रामीण छात्राओं को प्रेरित एवं आर्थिक मदद करती हैं। लेखन विधा-कविता,कहानी,लेख है। कई अखबारों में रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। डॉ. कुमारी की लेखनी का उद्देश्य-समसामयिक समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना है। पसंदीदा लेखक-रामधारी सिंह ‘दिनकर’ एवं प्रेरणापुंज-गुरु डॉ. विनोद कुमार सिंह हैं। आपका जीवन लक्ष्य-स्वयं और समाज को जागरूक करना है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति विचार-“देश और हिन्दी यानी ललाट और बिन्दी। दोनों की चमक बनी रहे,इसके लिए हमें समर्पित भाव से सेवा करनी चाहिए ।