नव वर्ष का उपहार

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ सुमित्रा की आँखों से अश्रुधारा निरंतर बह रही थी, आज वह बेसहारा हो गई थी। नीरा आंटी आज अचानक रात में सोईं तो सोती रह गई। उसके सिर के ऊपर से छत छिन गई थी। उसकी पालनहार आज दुनिया से विदा हो गईं थीं। वह उसे बेटी की तरह मानती थीं, कई … Read more

२ पुस्तक विमोचित

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दिल्ली। सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था ‘उद्भव’ ने सांस्कृतिक सम्मान व पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया। मुख्य अतिथि यमुनापार विकास बोर्ड के चेयरमैन अरविंदर सिंह लवली रहे। अध्यक्षता कुशाभाई ठाकरे पत्रकारिता विवि (रायपुर) के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. बलदेव भाई शर्मा ने की। मुख्य वक्ता जाने माने शिक्षाविद डॉ. अशोक पांडेय रहे। प्रो.डॉ. उमापति दीक्षित … Read more

शिव भज प्यारे

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव,शिव शिव शिव शिव भज प्यारे।माया-मोह को तज प्यारे॥ तू ना तरेगा बिन शिव कह के,कुछ तो सोच-समझ प्यारे।योनि-योनि भटक के मानव,तू बन पाया सच प्यारे॥शिव शिव शिव शिव भज प्यारे… प्रभु-कृपा से नाम मुख निकसे,प्रभु-प्रेम में सज प्यारे।वैभव तज के शिव … Read more

बिजी है फोन

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** आवाज आती है, ट्रिन ट्रिन ट्रिन,घंटी बजती है, फोन बिजी हैपता चलता है, इंसान बिजी है,यही फैशन है, फोन बिजी है। बात नहीं करना, मन नहीं है,दिखावा करना, फोन बिजी हैजरुरत हो तो, हर वक्त हाजिर है,दूसरों की जरूरत, फोन बिजी है। बातों को टालना, नेटवर्क नहीं है,जोर से बोलना, सुनना नहीं … Read more

कवि पुरुषोत्तम दास की स्मृति को किया ताजा

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आगरा (उप्र)। बृज भूमि के मूर्धन्य कवि पुरुषोत्तम दास अग्रवाल की १०५ वीं जन्म जयंती पर समारोह आयोजित किया गया। पायनियर फार्म हाउस (सिकंदरा) में इसका शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर डॉ. कमलेश नागर, श्रीमती बीना अग्रवाल, श्रीमति रमा वर्मा ने श्रीगणेश किया।प्रारम्भ में राम कुमार अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया … Read more

मेरा मुझमें कुछ नहीं

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मेरा मुझमें कुछ नहीं, सब कुछ तेरी माया,साँसों की हर लय में, तेरा ही स्वर छाया।मैं कौन यहाँ स्वामी, तू ही रचयिता है-तू बीज, तू अंकुर, तू ही हरिताया। बंधन कालचक्र का, थामे पग-पग जीवन,मद मोह मरीचिकाएँ, हरती मन का यौवन।लोभ क्रोध की आँधी में, टूटे विश्वास सदा-तेरी कृपा … Read more

गली-गली धुंध

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** गाँव-गली, शहर-नगर तक छाया धुँआ-धुँध,ठंडे में सन्नाटा पसरा, प्रदूषित ओस की बूँदरुकी रफ्तार ट्रक, बस, कार की, धुंध आँखें मूंद,कश्मीर-हिमाचल की ठंड को छोड़ो बर्फबारी अंधाधुंध। ठिठुरन-जकड़न में जन जीवन, आँखें हुई है कुंद,शीतलहर से सभी त्रस्त थे, खेल रहे हैं बाल मुकुंदखेतों में हरियाली आई, सरसों पीले फूल … Read more

‘सहयोग’ मौन अनुबंध

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सहयोग वह मौन अनुबंध होता है,वह करुणा की अस्थाई छाया होता है। जो मनुष्य को मनुष्य तो बनाए रखता है,इस सभ्यता के कठोर तट पर। यह कोई दया नहीं होता है,जब इतिहास ने हड्डियों से हथियार पहली बार गढे़ होंगे। तब भी अस्तित्व के पक्ष में,भय के विरुद्ध, किसी ने किसी का … Read more

वेनेज़ुएला संकटःकार्रवाई में नियंत्रण की साम्राज्यवादी सोच

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है, कि क्या अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था वास्तव में नियम-कानूनों से संचालित होती है या फिर ताकतवर राष्ट्रों की इच्छा ही वैश्विक न्याय का नया मानदंड बन चुकी है। निश्चित तौर पर वेनेज़ुएला पर … Read more

प्रेम चाहता हूँ…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** प्रेम करना चाहता हूँ-उससे, जो सुकून दे…जिसके पास रूह हो प्यार भरी,जो समझे मन की थाहजो देखे मेरे प्रेम की राह। प्रेम करना चाहता हूँ-उससे, जो तैरे नैनों के सागर में…समझे अँखियों की आशा,हर पल महसूस करे मन की भाषाजो थाम ले बस मेरा हाथ,चले कदम-दर-कदम मेरे साथ। प्रेम करना चाहता … Read more