आदमी की अब जरुरत नहीं

एल.सी.जैदिया ‘जैदि’बीकानेर (राजस्थान)************************************ आदमी को आदमी की,अब जरुरत नहीं है,मिलने की जरा-सी किसी को फुर्सत नहीं है। कितनी सीमित-सी हो गई है,दुनिया हमारी,सोचें हम जितना उतनी तो खूबसूरत नहीं है। काम से काम,दिखावा,बस यही सब शेष है,बेजान रिश्तों में चाह की अब हसरत नहीं है। पास से गुजर के भी लोग नज़र नहीं मिलाते,मौकापरस्त लोगों … Read more

हिन्दी हर तरफ हो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)**************************************************** अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस विशेष…. नये अब गुल खिलाना चाहती है।‌ये खुल कर मुस्कुराना चाहती है।‌‌दिलों में घर बनाना चाहती है।‌नहीं कोई ख़ज़ाना चाहती है।‌‌शिकायत हर मिटाना चाहती है।‌सियासत को हराना चाहती है।‌‌नहीं कुछ भी पुराना चाहती है।‌नये नग़मे सुनाना चाहती है।‌‌अदावत को मिटाना चाहती है।‌समय अच्छा बिताना चाहती है।‌‌जहां … Read more

तब होश था कहाँ

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचना शिल्प:बहर-२१२२,२१२२,२१२२,२१२; क़ाफ़िया-आरी,रदीफ़-हुई तारी हुई तब होश हमको था कहाँ,ज़िन्दगी भारी हुई तब होश हमको था कहाँ। बेखुदी में यार कुछ भी सोच हम पाये नहीं,उनसे जब यारी हुई तब होश हमको था कहाँ। था तकाज़ा इश़्क का हो गुफ्तगू उनसे ज़रा,जब ये बीमारी हुई तब होश हमको था कहाँ। दिल … Read more

सुर-ताल का उपहार दे गई

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** सुरों की अमर ‘लता’ विशेष-श्रद्धांजलि…. गीतों का इस जहान को भंडार दे गयी।संगीत का हमको नया संसार दे गयी। ‘दीदी’ कहा समाज ने हिन्दोस्तान ने,लाखों नए इस देश को फनकार दे गयी । जिस देवता के गीत को गाकर किया अमर,उस गीत से प्रदीप को आभार दे गयी। मैं क्या कहूँ … Read more

जिन्दगी

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** रचना शिल्प:१ २ २ १ २ २ १ २ २ १ २ २ गुजर कर रही जिन्दगी जिस डगर में,न हमराह कोई बने उस सफर में। बनी एक मन्जिल सभी के लिये है,चले साँस जितना समय हर उमर में। गिने किस तरह साँस या वक्त कोई,दिखें ही न दोनों … Read more

छिपा लेते तो अच्छा होता…

एल.सी.जैदिया ‘जैदि’बीकानेर (राजस्थान)************************************ तुम छिपा लेते अपना गुमान,तो अच्छा होता।तुम काबू में रख लेते जुबान,तो अच्छा होता। झुकी हुई ये आँख तुम्हारी यूँ कभी न शर्माती,गर कर लेते सभी का सम्मान,तो अच्छा होता। शर्मसार कर दिया जहां में सभी को तुमने यार,बचा लेते अगर बची हुई शान,तो अच्छा होता। इक फैसले से तेरे,कितनी गई थी … Read more

निकलने लगा फिर सवेरा

डॉ.अमर ‘पंकज’दिल्ली****************************************** तुम्हीं ने है तोड़ा अँधेरों का घेरा,निकलने लगा है नया फिर सवेरा। नये साल ने मुस्कुराकर कहा है,चमक सूर्य बनकर है ये साल तेरा। जहाँ तक समंदर है फैला हुआ अब,वहाँ तक है विस्तीर्ण आकाश मेरा। इशारों-इशारों में नागिन है कहती,बजा बीन नाचूँ मैं फिर से सपेरा। धुआँ ही धुआँ मुद्दतों दिल रहा … Read more

मुहब्बत का खुला पैगाम गाँधी

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)**************************************************** नया एंगिल नया आयाम गाँधी।हमारे मुल्क को इन्आम गाँधी। बुराई से रहे लड़ते हमेशा,मुहब्बत का खुला पैगाम गाँधी। भुला सकता नहीं सदियों ज़माना,जहां में कर गये वो काम गाँधी। अहिंसा लफ़्ज़ जब आया कहीं तो,ज़बां पर आ गया है नाम गाँधी। किसी से तुम करो बर्ताव कैसा,सिखाते थे हमें … Read more

सूखी है जमीं

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** रचना शिल्प:काफिया-आत(बात,सौगात,खैरात इत्यादि),रदीफ-हुई होगी २ २ १ १ २ २ २ २ २ १ १ २ २ २ जब दूर गगन,धरती,आपस में मिले होंगे,तब कितनी सुहानी-सी,कुछ बात हुई होगी। नजदीक से दिखते तो,कुछ बात खुली होती,धरती पे तभी सुख की सौगात हुई होगी। सब मेल दिलों के भी तबसे … Read more

न गुज़रे किसी पर

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) ***************************************** छलकती हैं आँखें ज़रा ‘सी खुशी पर।जो गुज़री है हम पर न गुज़रे किसी पर। परेशाँ हमें देखकर हँसने वालों।हँसी आ रही है ‘तुम्हारी ‘हँसी पर। मुसीबत उठाई है इतनी जहाँ में।तरस’ आ रहा है ‘हमें ज़िन्दगी पर। मुक़ाम अपना ख़ुल्देबरीं में था लेकिन।निकाले गए हम ज़रा-सी ‘कमी पर। बग़ल में … Read more