संजीदगी कुछ-कुछ
ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** रचनाशिल्प:२२१२ २२१२ २२१२ २२१२ आज फ़ित्ना में लगे पाकीज़गी कुछ-कुछ।मुस्कराहट लाएगी संजीदगी कुछ-कुछ। साँस बन बहते यहीं वादे सबा में तुम,हो रही महसूस अब मौजूदगी कुछ-कुछ। चाक है दिल क्यों चला सीने कहीं खंजर,बेलगाम कही सुनी शर्मिंदगी कुछ-कुछ। बेख़ुदी में गुम हयात फँसी घुटी चीखें,क्या नशे में भागती ये तिश्नगी कुछ-कुछ। एक … Read more