चुप कब तलक रहिये
राजबाला शर्मा ‘दीप’ अजमेर(राजस्थान) ******************************************************************************************** बेगानों की बस्ती में मेरे दिल कब तलक रहिये। न ये कहिये,न वो कहिये,छुपाते कब तलक रहिये। दिखायेंं किसको जख्मे-दिल,सुनायेंं किसको हाले-गम, न ये सुनते,न वो सुनते,सुनाते कब तलक रहिये। वो करके कैद मुझसे पूंछते हैं, “खुश तो हो जानम”, ऐसे दिलबर को दर्दे-दिल दिखाते कब तलक रहिये। वफा के … Read more