बंगाल:भविष्य धर्म की लहर या प्रगति की राह ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर … Read more

शाकाहारी भोजन ही श्रेष्ठ

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ शाकाहारी भोजन हमारे शरीर की मूलभूत आवश्यकता है। स्वस्थ शरीर के लिए शाकाहारी भोजन अमृत के समान है। आज विश्व में बढ़ते अत्याचार, मार-काट, हिंसा की इस एक लहर-सी चल पड़ी है, वहीं मनुष्य में दया, प्रेम, मानवता के खत्म होने का मुख्य कारण मांसाहार और मदिरापान है। भारतीय संस्कृति … Read more

उम्र को हावी न होने दें

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ आजकल अनेक महिलाएं अपने घर की दहलीज पार कर नौकरी या व्यवसाय में व्यस्त हैं, परंतु अभी भी बहुत-सी महिलाओं की बड़ी आबादी ऐसी है, जो गृहिणी कहलाती है। यह सुबह से रात तक घरेलू कामों में लगी रहती हैं। झाड़ू पोंछा, बर्तन, खाना आदि कामों में व्यस्त रहने के कारण उन्हें … Read more

मिलकर रचनी होगी संवेदना की संस्कृति

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बेटियाँ किसी समाज की संवेदना का दर्पण होती हैं। जहाँ बेटियाँ सुरक्षित, शिक्षित और स्वायत्त हैं-वहाँ सभ्यता की जड़ें गहरी होती हैं, पर विडंबना यह है कि आधुनिक प्रगति के दावों के बीच आज भी अनेक बेटियाँ असमानता, हिंसा और अवसर-वंचना का भार ढो रही हैं। ‘बेटी बचाओ’ जैसे … Read more

एआई:नवाचार की गति और नियंत्रण के बीच संतुलन की चुनौती

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** कृत्रिम मेधा (एआई) का विकास इक्कीसवीं सदी की सबसे तेज़ और प्रभावशाली तकनीकी प्रक्रियाओं में से एक है। कुछ ही वर्षों में एआई ने उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, रक्षा और मीडिया-हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह तकनीक उत्पादकता बढ़ा रही है, जटिल समस्याओं का समाधान सुझा रही है … Read more

डिजिटल धोखाधड़ी:ठोस व निर्णायक कदम जरूरी

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** डिजिटल युग ने भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं ने लेन-देन को सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाया है। आज एक सामान्य नागरिक भी कुछ सेकंड में देश के किसी भी कोने में धन भेज सकता है, बिल जमा कर … Read more

क्या से क्या हो गया…

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** ‘वैलेंटाइन-डे’ विशेष (१४ फरवरी)…. हर वर्ष १४ फरवरी आते ही वातावरण में एक विशेष प्रकार की चहल-पहल दिखाई देने लगती है। बाजारों में लाल रंग की भरमार, दिल के आकार के गुब्बारे, कार्ड, चॉकलेट, फूल और उपहारों की सजी-धजी दुकानें; मोबाइल और सोशल मीडिया पर प्रेम-संदेशों की बाढ़;और युवाओं में एक … Read more

असहायता

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** नई-नई तहसील बनी थी, इसलिए कुछ स्थाई स्टॉफ आ गया था तथा शेष स्टॉफ की अस्थाई नियुक्ति होनी थी। उक्त पदों पर तहसील के एक प्रभावशाली नेता अपने परिचितों की नियुक्ति करना चाहते थे, पर कपूर साहब इसके लिए तैयार नहीं थे। कपूर साहब विज्ञापन देखकर बाकायदा इन पदों को … Read more

आतंक और अंधकार के बीच संतुलन यानी शिव प्रकाश

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** महाशिवरात्रि विशेष (१५ फरवरी)…. १५ फरवरी को जब समूचा भारत ‘महाशिवरात्रि’ का पावन पर्व मनाएगा, तब यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मजागरण का विराट अवसर होगा। महाशिवरात्रि वह रात्रि है, जब साधक अपने भीतर के अंधकार को पहचानकर शिवत्व के प्रकाश से उसे आलोकित करने का संकल्प लेता है। शिव … Read more

सम्मानित स्त्रीत्व है समाज की वास्तविक परीक्षा

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसके ऊँचे भवनों, तकनीकी प्रगति या आर्थिक विकास दर से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने सबसे संवेदनशील वर्ग-महिलाओं और बच्चों को कितना सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरपूर्ण जीवन दे पा रहा है। जब हम परिवार, समाज और राष्ट्र की बात … Read more