व्यक्ति में आत्म-नियंत्रण जरूरी

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* आज का समाज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ बाहरी स्वतंत्रता तो बढ़ी है, पर आंतरिक अनुशासन लगातार कमजोर होता जा रहा है। मनुष्य के मन, मस्तिष्क, वाणी, कर्म और व्यवहार पर उसका स्वयं का नियंत्रण कम और बाहरी तत्वों का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। यह स्थिति केवल … Read more

भविष्य की राजनीति का स्पष्ट संकेत है भाजपा में युवा नेतृत्व

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** भारतीय राजनीति में लंबे समय से जिस क्षण की प्रतीक्षा थी, वह अब एक निर्णायक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय नेतृत्व की बागडोर युवा हाथों में सौंपने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नितिन नबीन को पार्टी का … Read more

बहुत कुछ कहता है ‘राष्ट्रीय ध्वज’

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** राष्ट्रीय चिह्न किसी भी देश की पहचान होते हैं। इन चिन्हों में देश का ध्वज उस देश की प्रमुख पहचान होता है। हम सब भारत वासियों में अपने राष्ट्रीय ध्वज के लिए आदर एवं निष्ठा है, पर हम इसके इतिहास के विषय में नहीं जानते। पहले इस झंडे का स्वरूप कैसा था, … Read more

‘दीपावली’ का वैश्विक होना सांस्कृतिक आत्मा की विजय

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘यूनेस्को’ द्वारा दीपावली को अमूर्त विश्व धरोहर घोषित किया जाना भारत की सांस्कृतिक चेतना का ऐसा महत्त्वपूर्ण क्षण है, जो न केवल भारतीयों को गौरवान्वित करता है बल्कि यह सिद्ध करता है कि भारतीय सभ्यता की आत्मा आज भी मानवता का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखती है। दीपावली मात्र एक त्योहार नहीं, … Read more

‘सोने की चिड़िया’ रहे देश की संसद किस दिशा में..?

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** देश के लिए सब कुछ तय करने वाला सर्वोच्च सदन यानी संसद, जिसे देश की सबसे पवित्र और सबसे जिम्मेदार लोकतांत्रिक संस्था माना जाता है, उसी में ‘वन्दे मातरम्’ कके लिए बहस के नाम पर अगर १० घंटे तमाशे का अखाड़ा हो, तो सोचना लाज़मी है कि ‘सोने की चिड़िया’ रहा … Read more

उत्तर व दक्षिण भारत के भाषा-सेतु ‘सुब्रह्मण्यम भारती’

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** ‘भारतीय भाषा दिवस’ (११ दिसंबर) विशेष… तमिल भाषा के सुप्रसिद्ध कवि महाकवि चिन्नास्वामी सुब्रह्मण्यम भारती (‘महाकवि भारतियार’) को भारत और भारतीय भाषाओं की एकात्मता के लिए याद किया जाता है। सुब्रह्मण्यम भारती का जन्म ११ दिसंबर १८८२ को तमिलनाडु के तूतुकुड़ी ज़िले के एट्टयपुरम् गाँव में हुआ। पिता चिन्नास्वामी अय्यर तमिल … Read more

कुछ रूमानी, कुछ सुहानी

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* ठंड की तासीर धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। पारा दिन-ब-दिन लुढकता ही जा रहा है। सुबह-शाम ठंड की चुभन बढ़कर रजाई लपेटने की चाह बढ़ती जा रही है। शहर की चारदिवारी से निकलकर इन दिनों मैं गाँव की ठंड महसूस कर रहा हूँ। बड़ा मजेदार अनुभव है-दिन में चमचमाती गुनगुनी-सी धूप … Read more

झुलसती संवेदनाएं और नाकाम व्यवस्था

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** एक बार फिर एक भीषण आग ने २५ मासूम जिंदगियों को छीन लिया। गोवा के नाइट क्लब में हुई यह त्रासदी केवल आगजनी नहीं, बल्कि हमारे तंत्र की जड़ता, गैर-जिम्मेदारी और नैतिक पतन की ज्वलंत मिसाल है। जो क्लब आग की चपेट में आया, वह नियमों की अनदेखी करके तो चलाया ही … Read more

पुतिन की भारत यात्रा से विश्व राजनीति की नई आहट

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा एक साधारण कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इतिहास के ७ दशकों में गढ़ी गई मित्रता का नवीन उद्घोष है। कहा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थायी मित्र और शत्रु नहीं, स्थायी हित होते हैं, किंतु भारत-रूस संबंध इस कथन की परिधि से आगे जाकर … Read more

‘इंसानियत’ का बीज बदल सकता है दुनिया

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘इंसानियत’ सुनने में एक शब्द है, लेकिन स्वयं के भीतर अनगिनत भावनाएँ समेटे हुए है। यह केवल किसी की मदद करना या दूसरों के लिए त्याग करना भर नहीं है, बल्कि इंसानियत वह ऊर्जा, अच्छाई और शक्ति है, जिसके सहारे समाज जीवित रहता है तथा दुनिया चलती है।कहना गलत नहीं होगा … Read more