ईरान युद्ध:अमेरिका व इजराइल का पीछे हटना विश्व के लिए जरूरी

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में पश्चिम एशिया एक बार फिर उस संवेदनशील मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहाँ किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव केवल क्षेत्रीय संकट नहीं रह जाता, बल्कि उसके प्रभाव पूरी दुनिया की शांति, अर्थव्यवस्था और मानव सुरक्षा पर पड़ते हैं। ईरान से जुड़े सैन्य तनाव और … Read more

गूँजती रहेगी सुरों की ‘आशा’

ललित गर्गदिल्ली*********************************** ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)… भारतीय संगीत का आकाश आज कुछ अधिक मौन, कुछ अधिक रिक्त प्रतीत होता है। स्वर की वह चंचल चिड़िया, जन-जन को चमत्कृत करने वाली आवाज जिसने दशकों तक हर हृदय में मधुरता के बीज बोए, आज भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच न हो, … Read more

आधुनिक हिंदी आलोचना के मार्गदर्शक व्यक्तित्व प्रो. सुशील कुमार शर्मा

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** समकालीन हिंदी साहित्य के विस्तृत परिदृश्य में कुछ ऐसे व्यक्तित्व उभरते हैं, जिनकी उपस्थिति केवल उनके लेखन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे एक विचारधारा, एक बौद्धिक परम्परा और एक सांस्कृतिक चेतना का प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। प्रो. सुशील कुमार शर्मा इसी श्रेणी के ऐसे विशिष्ट साहित्यकार और आलोचक हैं, जिन्होंने … Read more

अहंकार से नहीं जीता जा सकता युद्ध

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** पश्चिम एशिया की धरती की तपती रेत पर जो युद्ध आरंभ हुआ था, उसके पीछे चंद घंटों में विजय का स्वप्न सत्ता पक्ष के सामने प्रस्तुत किया गया था। एक निश्चित विजय का निर्णायक परिणाम और फिर विजय नाद के साथ घर वापसी, परंतु इतिहास गवाह है कि वह अहंकार को शीघ्र … Read more

जब सिपाही ही चोर हो…

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** ‘जब सिपाही ही चोर हो’ यह वाक्य केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि किसी भी राष्ट्र-राज्य की आत्मा पर लगा वह गहरा घाव है, जो उसके संस्थागत ढांचे, नैतिक आधार और लोकतांत्रिक विश्वास को भीतर से क्षत-विक्षत कर देता है। आधुनिक राष्ट्रों की स्थिरता का आधार केवल उनकी सैन्य शक्ति, आर्थिक क्षमता … Read more

किशोर आक्रामकता पर अंकुश आवश्यक

ललित गर्गदिल्ली*********************************** भारतीय किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति एवं क्रूर मानसिकता चिन्ताजनक है, नए भारत एवं विकसित भारत के भाल पर यह बदनुमा दाग है। कुछ समय से किशोरों में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति निश्चित रूप से डरावनी, मर्मांतक एवं खौफनाक है। चिंता का बड़ा कारण इसलिए भी है, क्योंकि जिस उम्र में किशोरों … Read more

युद्ध से हर ओर विघटन, शांति ही प्रगति

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* युद्ध व शांति-जरूरी क्या ?.. युद्ध एक विनाशकारी घटना है और इसका विपरीतार्थक शब्द शांति है। युद्ध विनाश, दु:ख और पीड़ा लाता है, जबकि शांति सुख, समृद्धि और विकास का मार्ग दिखाती है। युद्ध से मानवता को अपार क्षति होती है। यह मानवता को तार-तार कर देता है, जबकि शांति समाज … Read more

डाक विभाग द्वारा राजभाषा हिन्दी की जान-बूझकर अनदेखी

सेवा में, माननीय गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक, केन्द्रीय कार्यालय भवन, शहीद भगत सिंह मार्ग, मुम्बई – ४००००१ विषय: डाक विभाग द्वारा नेट बैंकिंग सेवा में राजभाषा हिन्दी की जान-बूझकर की जा रही अनदेखी, भाषाई भेदभाव एवं पिछले ९ वर्षों की शिकायतों पर हठधर्मिता के विरुद्ध शिकायत। संदर्भ (विगत ९ वर्षों का संघर्ष): 🔹नवीनतम शिकायत: DPOST/E/२०२६/०००२२०४ … Read more

मानवता के लिए युद्ध ठीक नहीं

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ युद्ध और शांति-जरूरी क्या ? वैश्विक स्तर पर जो युद्ध चल रहा है, उसे देखते हुए तीसरे ‘विश्व युद्ध’ का खतरा मंडरा रहा है। अमन, चैन सौहार्द और भाईचारे से मानवीय मूल्यों का स्तर बना रहता है, पर हिंसा मार-काट के बीच ‘युद्ध’ ठीक नहीं कहा जा सकता है। इस … Read more

कोरियन नाटक: भारतीय मनोरंजन की दिशा पर पुनर्विचार आवश्यक

ललित गर्गदिल्ली*********************************** विश्व के मनोरंजन जगत में पिछले कुछ वर्षों में यदि किसी देश ने टेलीविजन और वेब सीरिज के माध्यम से पूरी दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है, तो वह दक्षिण कोरिया है। कोरियन नाटक (ड्रामा) केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रभाव, सामाजिक शिक्षा, भावनात्मक परिपक्वता और जीवन मूल्यों के प्रस्तुतिकरण का सशक्त … Read more