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उम्र को हावी न होने दें

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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आजकल अनेक महिलाएं अपने घर की दहलीज पार कर नौकरी या व्यवसाय में व्यस्त हैं, परंतु अभी भी बहुत-सी महिलाओं की बड़ी आबादी ऐसी है, जो गृहिणी कहलाती है। यह सुबह से रात तक घरेलू कामों में लगी रहती हैं। झाड़ू पोंछा, बर्तन, खाना आदि कामों में व्यस्त रहने के कारण उन्हें अपने शौक या कहा जाए तो स्वयं के लिए कुछ करने को तो दूर; सोचने के लिए भी फुर्सत नहीं मिल पाती। यही वजह है कि उनके जीवन में अवसाद अपने पैर पसारने लग जाता है। इसलिए आवश्यक है कि महिलाएं अपने लिए भी कुछ समय निकालें।
हमेशा पति और बच्चों का ख्याल करने और प्यार करने के साथ-साथ स्वयं से भी प्यार करें। अपने मन को नकारात्मक विचारों से दूर रखें। नकारात्मक विचार आपको अस्वस्थ करके असमय बूढ़ा कर देतें हैं। अपनी खासियत और उपलब्धियों पर गर्व कीजिए। आप स्वयं पर विश्वास रखें, उससे आपको स्वतः ही दूसरों से सम्मान प्राप्त होगा।
समय और उम्र अनुसार खुशी के मानदंड बदलते रहते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, हमारी पसंद- नापसंद के साथ साथ जीवन जीने का तरीका भी बदलता जाता है। उम्र के बढ़ते कदम के साथ यदि आप खुश रहना चाहती हैं, तो पहले तो अपने को समय के साथ अपडेट रखें। दूसरे आप अपने व्यक्तित्व में निखार के प्रति सदैव सचेत रहें। अपने व्यक्तित्व और सौंदर्य के प्रति कभी भी लापरवाही न बरतें।
४० की उम्र आते-आते आप समझ लेते हैं कि आप आखिर में क्या चाहते हैं ? अब वह समय है, जब आप उस काम को पूरे उत्साह और लगन से करें, जिस काम को आप पहले करना चाहतीं थीं, लेकिन कर नहीं पाईं थीं। जैसे-आपको पेंटिंग का शौक था, लेकिन पहले आप कभी उसको कर नहीं पाई। अब जब आप पेंटिंग करिएगा तो बहुत खुशी होगी। गार्डनिंग, नृत्य, योगा आदि जिसमें भी आपको रुचि है, वह करिए। आप देखिएगा कि आपको कितनी खुशी महसूस होगी। पहले कभी बैडमिंटन खेलना आपको बहुत पसंद था, लेकिन नहीं खेल पाई। आप देखिए कि इस समय खेलने के बाद आपके तन और मन दोनों को नई ऊर्जा से भर देगा।
ऐसे ही अपने जीवनसाथी के साथ रिश्ते पर ध्यान दें, उनके लिए सरप्राइज डिनर प्लान करें, या पहले की तरह पति के साथ उनकी पसंदीदा जगह पर जाएं। दोनों के रिश्ते में दूरियाँ बढ जाएं, उसके पहले ही सचेत हो जाएं। उम्र का कोई भी पड़ाव हो, रिश्ते जीवन के लिए सबसे मूल्यवान होते हैं। यदि आपके पास कोई अपना नहीं है, जिसके साथ अपनी खुशियाँ और उपलब्धियाँ साझा कर सकें, तो आपको वह उपलब्धियाँ एवं खुशियाँ अधूरी लगेगीं। आपसी रिश्ते ही ऐसे होते हैं, जो हमें संतुष्टि और खुशी प्रदान करते हैं। इसलिए रिश्तों में गर्माहट जरूरी है। उस पर धूल न जमनें दें और इसके लिए निरंतर प्रयासरत रहें। चाहे पति पत्नी हो, या अन्य कोई रिश्ता। स्वयं को नजर अंदाज न करें।
४० की उम्र तक आप जिम्मेदारियों के बोझ से घिरे रहते हैं, परंतु यही समय है जब आप अपने भविष्य को सुनियोजित करने के लिए बचत योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। घर खरीदने, बच्चों की शिक्षा के लिए बचत योजना और चिकित्सा योजना में निवेश कर सकते हैं, जो भविष्य में आपको सुरक्षा और चिंतामुक्त करेगा।

इस तरह से आप अपनी व्यस्तता एवं सोच के साथ भविष्य की रूपरेखा बनाकर अपने जीवन को सुरक्षित कर आगामी वर्षों का आनंद उठा कर प्रसन्नतापूर्वक जीवन यापन कर सकती हैं।