खतों की बात पुरानी हो चली…
डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** वो भी क्या दिन थे जब खतों में दिल का हाल लिखा जाता था…कोरे कागज पर जज़्बात उकेरे जाते थे…लफ़्जों में अहसास पिरोये जाते थे…पढ़ने वाला भी उसी शिद्दत से हर्फ़ दर हर्फ़ महसूस करता था…खत भेजने में भी वही शिद्दत होती थी…जवाब आने के इंतज़ार में भी वही … Read more