प्रभु जी तोसे नेह लगाऊँ

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** प्रभु जी तोसे नेह लगाऊँ जी,करुणा निधि हो खान गुणों की,गुण नित गाऊँ जी। मान अपमान से ध्यान हटाओ,तुमको ध्याऊं जी,तुम ही गुरु हो, तुम ही सखा हो,तुम को मनाऊँ जी। मेरे शीश पे हाथ धरो अब, भव तर जाऊँ जी,माया विष पी नित्य-निरंतर,अगन बुझाऊँ जी। शेष आस ना … Read more

हर पल साथ निभाती

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)… सबसे अच्छी दोस्त पुस्तकें, हर पल साथ निभाती हैं।अँधियारे में दीप जलातीं, हमको राह दिखाती हैं॥ वाहक पुस्तक साँच की, पुस्तक है सौगात।पुस्तक ने इस लोक से, की है हितकर बात॥पुस्तक देती चेतना, नया सोच दे नित्य।पुस्तक को मानें सभी, जैसे हो आदित्य॥अनुशासन … Read more

सपनों का संसार सजाती

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)… पुस्तक हमको ज्ञान सिखाती,पुस्तक जीना हमें बताती।यदि भटकें अनजान राह पर,पुस्तक हमको मार्ग दिखाती। जीवन की बगिया के अंदर,रंग-बिरंगे फूल खिलाती।राष्ट्र प्रेम को मन में लेकर ,देशभक्ति का भाव जगाती। मानवता का पाठ पढाकर,सेवा का इक धर्म बताती।खुश होकर त्यौहार मनाते,यह संस्कारी … Read more

किताबों संग रंग जाते थे…

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)… खोए-खोए से ख्वाबों में,हम दो दुनिया में जीते थेसुंदर पल, प्यारे बचपन में,पुस्तकों से चुराया करते थे। चम्पक, बिल्लू, चाचा चौधरी,ज़िंदगी का हिस्सा लगती थीसरिता, मुक्ता, मनोहर कहानियाँ,मनभावन किस्सा लगती थी। दिनचर्या से समय चुराकर,पुस्तकालय घूम आते थेबचपन के कोरे से दिन,किताबों संग … Read more

हम सभ्य हो रहे हैं…

ऋचा गिरिदिल्ली*************************** हम सभ्य हो रहे हैं, पहले से कहीं और अधिक। हमारे अंदर जितनी अधिक सभ्यताउतनी ही संवेदनहीनता,और जितनी संवेदनहीनताउतनी ही व्यावसायिकता। यह हमारे विकास के लिए जरूरी है…वाकई ?

डरपोक दुश्मन, बरसा गए गोलियाँ

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** ‘पहलगाम’,असहाय निर्दोषआतंकी हमला किया,कायरता-बुजदिलीचीख। ‘पहलगाम’,था अमनआँखों में सुकून,स्वर्ग कश्मीरबर्बरता। ‘पहलगाम’,क्या किया ?आतंकी अमन चुभा,इंसानियत हत्यारेअमानवीयता। ‘पहलगाम’,डरपोक दुश्मनबरसा गए गोलियाँ,करो सामनासेना। ‘पहलगाम’,लड़ो सामनेआओ मैदान में,दिखाएंगे वीरतामौत। ‘पहलगाम’,आतंकवाद-हिंसाअरे छोड़ दो,क्या हासिल ?बर्बादी। ‘पहलगाम’,इंसानियत शर्मसारसैलानियों पर वार,उजड़ा सिंदूरजीवन। ‘पहलगाम’,कब तकऐसे हमले सहेंगे ?चुप रहेंगे ?कत्लेआम। ‘पहलगाम’,आतंकी घटनाअमन-चैन दुश्मनी,रोयी वादियाँसंसार। ‘पहलगाम’,नदियाँ दुखीबही खून धारा,रोए पहाड़हैवानियत। … Read more

मन की पीड़ा

जी.एल. जैनजबलपुर (मप्र)************************************* शब्द हैं रूके-रूके,नैन हैं ठगे-ठगेअतिथि सभी छले गए,नाम धर्म का, मौत दे गए। सर झुके-झुके,कदम नहीं रूकेबीबी रोई, बच्चे भी रोए,नाम धर्म का, मौत दे गए। पर्वत भी चीखों से पिघल गए,कश्मीर से रोजी-रोटी लूट गए।चंद जयचंद फिर मिल गए,नाम धर्म का, मौत दे गए॥

पुस्तक सामर्थ्यवान बनाए

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)… पुस्तक सामर्थ्यवान बनाए,पुस्तक आशावान बनाएआन-बान-सम्मान दिलाए,सच्ची सखी, जीना सिखाएअंत:सह बाह्य स्थिति सुझाए। पुस्तक सामर्थ्यवान बनाए,पुस्तक आदर्शवादी बनाएराह दिखा विवेकी बनाए,श्रेष्ठ, सार्थक जीवन बनाएराग, द्वेष, घृणा, दर्प मिटाए। पुस्तक सामर्थ्यवान बनाए,लगाएं प्रीत, मीत बनाएंरिष,‌ चिंता, निराशा भगाएं,हमदर्दी, हमराही बनाएंलौकिक मोह-माया भुलाएं। पुस्तक सामर्थ्यवान … Read more

प्रभु से मिलन को चाहिए ‘पुस्तक से दोस्ती’

विजयलक्ष्मी विभा प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)************************************ क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)…. भौतिक जगत में वांछ्य है,‘मेहनत’ से दोस्ती,प्रभु से मिलन को चाहिए,‘पुस्तक से दोस्ती। मेहनत ने दिखाया हमें, संसार का वैभव,ऊँची हवेलियों में हो, आराम का अनुभवचाहे जहां उड़ जाते हैं, पंछी की तरह हम,मेहनत ने दिखाया हमें, इंसान में यह दमफिर भी जरूरी जग … Read more

मेरी अच्छी दोस्त पुस्तकें

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* क्या सबसे अच्छी दोस्त…? (‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष)… पुस्तकों तुम इतिहास हो,पुस्तकों तुम वर्तमान होपुस्तकों तुम भविष्य हो,पुस्तकों तुम अच्छी दोस्त होपुस्तकों तुममें सजे हुए हैं,अनगिनत शब्दों के भंडार। आदिकाल की सत्यता हो,आदिकाल की लय-छंद होआदिकाल की हो कहानियाँ,पुरातन का विज्ञान होबीते कल का सम्मान हो। मानव भावों की स्थितियाँ,जीवन … Read more