बतलाती मन का दर्द

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कविता कहाँ से निकली है ?यह प्रश्न अगर पूछे कोईक्या उत्तर देना बताती हूँ,,यह बात तुम्हें समझाती हूँ। मन के अन्दर कुछ उमड़ रहा,बाहर आने को मचल रहाकैसे रच काव्य में ढाल रहा,मन के भावों को निकाल रहा। बात कभी दिल की कहती,धीरे-धीरे कविता बढ़तीबतलाती मन की पीड़ा का दर्द,वह हृदय के … Read more

विन्ध्यअर्भा-क्षिप्रा

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** क्षिप्रा प्रिय तटिनी, अमृतधारिणी, जलवाहिनी,धरागर्भा विन्ध्यअर्भा पतितपावन ओ! प्रवाहिनीमालव प्रदेश सिंचीनी दिव्यगर्भा वसुंधरा मानिनी,चर्मण्वती विलयीता, अनुताप लिलयिता पुण्यधारिनी। महांकाल स्वयं विराजे पावन तटपर रजनीगंधा,सान्दिपानी आश्रम में शिक्षारत रहे जहां मुकुंदामाँ हरसिद्धी के आलोक से विलसित जो आनंदकंदा,भृतुहरी, गुरु गोरक्षनाथ ने यहाँ पाया अनहद आनंदा। ओ! ऋषिवर अत्री के प्रखर तप से … Read more

अंधा कानून…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** कैसे करें हम,न्याय पर विश्वास।जब मिल रहा हो,करोड़ों का काला धनन्यायाधीश के पास॥ परिचय-डॉ. प्रताप मोहन का लेखन जगत में ‘भारतीय’ नाम है। १५ जून १९६२ को कटनी (म.प्र.)में अवतरित हुए डॉ. मोहन का वर्तमान में जिला सोलन स्थित चक्का रोड, बद्दी (हि.प्र.)में बसेरा है। आपका स्थाई पता स्थाई … Read more

कर्मफल का खेल

मानसी श्रीवास्तव ‘शिवन्या’मुम्बई (महाराष्ट्र)****************************************** जीवन है ज्योत मनुष्य का,मानवता के मूल्यों का।एक-दूसरे पर किए गएपरोपकार के लेन-देन का। इतिहास उठा कर देखते हैं तो,ज्ञान होता है कर्मों का।जिसके जैसे थे कर्म,मिला है उसे वैसा फल। अहंकारी रावण हो या,मर्यादित श्री राम हो।कौरवों का घमंड हो या,पांडवों का विश्वास हो। प्रारंभ सभी का कर्म से है,और … Read more

कहाँ मिलेगा निर्मल जल

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** जल ही जीवन, जल ही कल, जल जीवन बल,सागर से नदियों तक धारा कल कल छल-छलसंरक्षण से दूर हुए हम, दुरूपयोग है पल-पल,त्राहि-त्राहि करना होगा, कहाँ मिलेगा निर्मल जल ? जल संचय भी करना है और अपव्यय से भी डरना है,बढ़ती आबादी की खातिर, अभी बहुत कुछ करना हैबिन पानी … Read more

क्यों न फिर कविता लिखूं ?

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* सोच रही हूँक्या लिखूं ?कविता लिखूं,ग़ज़ल लिखूं। गीत लिखूं,कहानी लिखूंजो भी लिखूं,हो प्रेम से शुरू। और प्रीत पर अंत,खुशियाँ हो जिसमें अनंतन हो जिसका आदि न अंत,तेरे मेरे जीवन का मंत्र। सुबह का स्वस्थ आगाज़ लिखूं,संध्या की शुभ बेला लिखूंसूर्य के दीप्तिमान रथ पर सवार,चाँद-सितारे की रौशनी से लैस। भारत का … Read more

भूलना मत इनको…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** भगत सिंह-राजगुरु-सुखदेव जयंती (२३ मार्च) विशेष… किया अर्पित,तन-मन देश कोहै बलिदान। भूलना मत,यादें इतिहास मेंआज ‘भगत।’ देश पहलेसोचा भगत सिंहमिली आजादी। ‘सुखदेव’ क्यों,याद नहीं देश कोये हिंदुस्तान! जान लुटाई,आज़ादी शंखनादरखना याद। भारत गढ़,योगदान सबकाथा अनमोल। फिर बनाओ,भगत सिंह कोईदेखे जो देश। हो ‘सुखदेव’,करे बात सबकीऐसा हो वीर। कैसे भूलेंगे!‘राजगुरु’ थे वीरअमर … Read more

दुनिया को खुशियाँ मिले

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भाईचारा विश्व में, फैलाता संदेश।समझो भारतवर्ष यह, समरसता परिवेश। शान्ति दूत मेरा वतन, पाता जग सम्मान,परमारथ सत्पथ चले, कर्मवीर पहचान। पृथ्वी ही परिवार है, पाठ दिया संसार,नीति प्रीत सद्भावना, भारत का उपहार। अपनापन अहसास दे, रिश्तों को परिभाष,दुनिया को खुशियाँ मिले, है भारत अभिलाष। संस्कार जीवन मिले, सदाचार पथ … Read more

हमारा बिहार

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** भारत के ईशान विराजे,कंठ मालिका मणि बन साजेइसकी महिमा है अति भारी,जनक सुता की धरणी प्यारी। देवासुर जब जलधि मथाया,मंदार को मथनी बनायाचौदह रत्न यहाँ से पाया,विश्व को अमृत कलश दिलाया। शासन का नया अर्थ बताया,जन को गण का सार सुनायालिक्ष्वी को गणराज्य बनाया,दुनिया को नया मार्ग दिखाया। विद्यापति की धरा … Read more

आता है क्रोध

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* करते जन ढोंग-ढकोसला, स्वांग दिखावा होड़म-होड़,सबको बनना दूसरों जैसा, अपने जैसा बनना छोड़जीवन में ला रहे गतिरोध, मुझको तब आता है क्रोध…। दूसरों के घरों ताक-झांँक, टांग अड़ाते बढ़ते देख,अच्छे को अच्छा कह न सके, भल में निकाले मीन मेखअपना अवगुण करते न शोध, मुझको तब आता है क्रोध…। जिसके लिए कर्मचारीगण, … Read more