आओ, सनातन की ओर चलें

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* गहन तिमिर से नाता तोड़ें, उजियारे को अब भाएँज्ञान, चेतना, नव विवेक का, दीपक सतत् जलाएँ।यूँ ही नहीं कभी हम भटकें, अब व्यर्थ न आँख मलें,वापस लौटें फिर अब गृह को, आओ, सनातन की ओर चलें…॥ बहुत हो चुका बिन विवेक के, भूल-भुलैया में सब थे,तजकर निज संस्कार,दीन थे,ता-ता थैया में … Read more

सात रंगों का त्योहार

मानसी श्रीवास्तव ‘शिवन्या’मुम्बई (महाराष्ट्र)****************************************** रंग बरसे… (होली विशेष)… यह बेला है रंगों की,जिसमें है साथी-संगी। पकवान हैं मीठे-मीठे,जिसे खाने में सभी जुटे। त्योहार है यह बहार की,फागुन में बरसती फुहार की। लाल-हरा-पीला-गुलाबी,अनगिनत हैं कितने रंग यहाँ भी। अच्छाई की जीत का,यह अलग एक जश्न है। बुराई को है त्यागना,जिसका यह एक संदेश है। जब सात … Read more

मन मेरा सुन्दर

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** मन मेरा सुन्दर,तन कुछ समझे नामन कहे भज ले हरि,तन यहाँ मोह से परे ना। कहता मन,तन को ना देखोहै नहीं यह तेरातजना है यह सारा। मन मेरा सुन्दर,तन कुछ समझे नामन चाहे हरि शरण,तन धन का करे वरण। तन हो गया आदी,यहाँ सुख भोग कामन जानता है पूरा,यह जीवन … Read more

केसरिया रंग मोहे

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* केसरिया नित मांगलिक, धर्म सनातन मान।भारत माँ परिधान यह, ध्वजा तिरंगा शान॥ केसरिया परिधान मन, मोहे प्यारे रंग।लगे प्रिया तनु चारुतम, भर दे प्रीति उमंग॥ महाशक्ति मानक सदा, स्वाभिमान ध्वज देश।सत्प्रेरक विजयी समर, केसरिया परिवेश॥ राष्ट्रधर्म प्रतिमान यह, केसरिया शुभ रंग।बजरंगी पहचान बन, भरता अंग उमंग॥ कुसुमाकर की अरुणिमा, … Read more

फागुन की बहार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** फागुन की बहार आई,करके श्रृंगार आईटेसुओं के रंग की,छटा बिखेर लाई है। पवन झकोरे चलें,डालियाँ भी झूम उठींमधुबन में फिर से,बहार कोई आई है। लाल, गुलाबी, पीत,परागी, सिंदूरी रंगरंग और गुलाल की,फुहार मन भायी है। सरसों के खेत लहराए,देखो ऐसे आजपीला परिधान ओढ़,धरा मुस्कुराई है। उड़े हैं गुलाल चारों,इन्द्रधनुषीधरती से अम्बर के,मिलन … Read more

चैत में ‘राम’ छाँव

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** राम चैत की चिलचिलाती धूप में नीम की ठंडी छाँव है,राम भरी ग्रीष्म में औघड़ पीपल पर लहलहाती पत्तियों का गाँव हैराम शिशिर की सांवली काया पर छाया फूलों का पड़ाव है,राम चम्पा की चितवन चुराती मंगल खुशबू का छिड़काव है। राम आम पर लटकती झूलती मस्तमौला अमियों की मस्ती है,राम … Read more

इरादों से ऊँची कोई चट्टान नहीं

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* चल दिए हैं नयी मंज़िल की ओर,नये सफर की ओर, नयी डगर की ओर। माना कि मंज़िल अभी दूर है,पर हौसले हों बुलंद तो कुछ भी दूर नहीं है। जब ज़हन में हो दर्द तो चीख निकलती है,इरादे हों बुलंद तो ज़हन में उमंग उठती है। रुक जाना नहीं कभी राह … Read more

स्वागत में हर्ष

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** शुक्ल पक्ष के चैत्र से आया है नववर्ष,स्वागत में हिंदू जगे दिल में लेकर हर्षनवरात्र जगदम्बे आराधना देता नव उत्कर्ष,हर घर भगवा ध्वज लगे अद्भुत ये आकर्ष। माँ शक्ति की पूजा हो कैसे, सब लें परामर्श,पूजा विधि जटिल है संत से कर लें विमर्शकन्या पूजन सार्थक है, करना इसे सहर्ष,नव … Read more

हाँ, मैं कर्ण…

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* क्षत्रिय कुल का अंश था,तेजस्वी सूर्य का वंश थासंयोग से कोख में आ गया,हाँ, मैं कुंती पुत्र कर्ण था। कुल की लाज बचाने को,पितृ का नाम छिपाने कोसूर्यपुत्र होकर भी कर्म-वश,त्यागा माता ने प्रिय पुत्र को। घुंघराले केशो के गुच्छ से,आच्छादित नयन-नक्श सेकर देती बयां यह सच्चाई,मैं था किसी क्षत्रिय-कुल से। … Read more

रणवीरों की होलियाँ

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** रंग बरसे…(होली विशेष)… रंगों की होली से ना हो चूर ऐ दुनिया,देख सरहद पर लाल-रंग कैसे बिखरा पड़ा हैजश्न-ए-रंग की खुमारी से तू बाज आ,देख! सरहद की खातिर कैसे रणवीर खड़ा है। खून की होलियाँ देखो वो कैसे खेलने चले हैं,मांग माँ की देखो खून से भरने को वो अड़े हैंभर लो … Read more