आओ, सनातन की ओर चलें
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* गहन तिमिर से नाता तोड़ें, उजियारे को अब भाएँज्ञान, चेतना, नव विवेक का, दीपक सतत् जलाएँ।यूँ ही नहीं कभी हम भटकें, अब व्यर्थ न आँख मलें,वापस लौटें फिर अब गृह को, आओ, सनातन की ओर चलें…॥ बहुत हो चुका बिन विवेक के, भूल-भुलैया में सब थे,तजकर निज संस्कार,दीन थे,ता-ता थैया में … Read more