मैं शिव बन जाऊँगी

ऋचा गिरिदिल्ली******************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष) संसार के ताने-बाने,समाहित करकमलासन मुद्रा में बैठकरलय में,ओंकार का जाप करूँगी। ॐ की ध्वनि,जब ब्रह्माण्ड के ॐनाद से तादात्म्य होगी,नया संसारनिर्मित करूँगी। इसी ध्वनि से,संसृति के सबसे जहरीले जीव सेजहर निकालकर,अमृत बनाऊँगी। सकारात्मक ऊर्जा,के आघात सेनकारात्मक ऊर्जा का,विध्वंस करूँगी। बढ़ते हुए अर्धचंद्र,गंगा पर सजाकरउस पर अलंकृत,बरगद के … Read more

सबसे रिश्ते निभाती नारी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… नारी से नारायणी बन,करती सबका कल्याणसंसार में एक नाम है तेरा,जो जीवन की नैय्या पार लगातीरिश्तों के रूप धरकर,सबसे रिश्ते निभातीनारी से नारायणी बन,असंभव को संभव बनाती। दुःख में संग रहती,खुशियों में भी आँसू बहातीखुद भूखी रहकर,सबके पेट भरवातीनारी तुम इसलिए नारायणी कहलाती। हर पद … Read more

तू दंडकारिणी, स्वयं नारायणी

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… धधक उठी है हृदय में ज्वाला,रूप लिए वो अति विकरालापौरूषता आज बेबस पड़ी है,निकल पड़ी है निर्भया बाला। धरती उसकी, अम्बर भी उसका,चहुंओर बजे जिस का डंकाकांपे रावण सुन नाम सिया का,धू-धू जले पल एक जो लंका। अबला नहीं, तू सबला-तू शक्ति,तू ही साहस की महाभिव्यक्तितेरे … Read more

महकाती आँगन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)…. संसार ‘नारी’,महकाती आँगनहै अनुपम। ‘नारी’ से जग,हर ख़ुशी त्योहारघर श्रृंगार। ‘नारी’ ममता,नारायणी है नारीहै समर्पण। ‘नारी’ रूप माँ,बहन-सुता-वधूमूर्त निःस्वार्थ। ‘नारी’ है प्रेम,सुकून का आँचलअति दुर्लभ। ‘नारी’ है शक्ति,संभाले सब-कुछवात्सल्य मूर्ति। ‘नारी’ सर्वत्र,प्रतिष्ठा दो कुल कीबन कल्याणी। ‘नारी’ बिन क्या,महिला जग धुरीतत्व अस्तित्व। ‘नारी’ है मान,बचाना … Read more

नारी हूँ, संघर्ष करती हूँ

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… सदियों से पूज्य रही हूँ,कन्या रूपेण मातृ रूपेणसीता भी मैं हूँ राधा भी मैं हूँ,द्रौपदी और गांधारी भी मैं हूँ। मैं नारी हूँ…कभी बेटी तो कभी बहनकभी प्रेमिका तो कभी पत्नी,मैं ही माँ भी हूँजीवन में पल-पल रूप बदलते रहे पर रहती तो नारी ही हूँ। … Read more

नारी से संसार

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… नारी महकती बगिया आँगन,नारी से है व्रत त्योहारनारी मस्तक का ताज श्रृंगार,नारी रहित बेरंग संसारक्योंकि नारी है नारायणी…। नारी रूप माँ-बहन-सुता-वधू,नारी मूर्त निःस्वार्थ समर्पण प्रेम सुख-सुकून ममता भरी गोद,है अति दुर्लभ यह सुख-सम्मान क्योंकि नारी है नारायणी…। नारी दुर्गा सिया सावित्री,सती, तुलसी, द्रौपदी, अहिल्याउग्र … Read more

ओ नारी, बन जा बेदाग अनुकृति

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… ईश्वर प्रदत्त कोमल काया थी,स्वर्ण रूपी अनमोल माया थीसहारा कांधे का पाकर स्त्रियाँ,छत्रछाया में पुरुष की महफूज़ थी। ममता की मूरत कहलाई,सारे जगत में सराही गई,मातृत्व का वरदान पाकर,पुरुष की सहयोगी कहलाई। पर हाय नारी, क्यों तू कठोर, कर्कश हुई ?स्त्री-अपराध में, क्यों तू ही … Read more

वक़्त के साथ तत्पर

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)…. कौन-सी गाथा तेरी छोडूं,मैं कौन-सी गाथा गाऊँसब बढ़कर एक से एक,है नारी तेरे रूप अनेक। कैसे भूलूँ भरी सभा में,केश पकड़ लाई गयी थीधोए थे जब केश लहू सेतब मन को शांति आई थी। प्रेम दीवानी मीरा बनकर,विष का प्याला पी जाती हैपतिव्रत धर्म निभाने को,सीता … Read more

नया सवेरा लाएँ

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** भेदभाव के अंधेरे मिटाएँ,नया उजाला हम लाएँजाति-धर्म के बंधन तोड़ें,हर दिल में प्रेम ही जगाएँ। न हो रंग का कोई फरक,हो हर चेहरे में चाँद-सी चमकअमीरी-गरीबी की ना हो दीवार,सबको मिले समान महक। लिंग, भाषा, रूप न देखो,सिर्फ इंसानियत को देखोहर हाथ को आगे बढ़ाओ,सबमें समानता की लौ देखो। एक दुनिया … Read more

संग ले जाने को कुछ भी नहीं

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* किसकी चिन्ता में खोया मन संग ले जाने को कुछ भी नहीं,नाशवान भौतिक सुख साधन,संग ले जाने को कुछ भी नहीं। मानव तन दिया जिसने तुझको, ईश्वर गरिमा कुछ दिखी नहींसब जीवों में श्रेष्ठ बनाया, उसका मतलब कुछ गढ़ा नहीं। हुआ लक्ष्य विशेष जन्म मनुज, पुरुषार्थ नवल युग रचा … Read more