धुआँ-धुआँ-सी नारी ज़िन्दगी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सिहर उठता हूँ नारी-उत्पीड़न देखकर,दहल उठता हूँ नारी प्रति शोषण देखकरकहीं दहेज है, कहीं घरेलू हिंसा हैकहीं बलात्कार है,धुँआ-धुँआ-सी नारी ज़िन्दगी। कहीं जघन्यता के समाचार हैं,कहीं छेड़खानी से भरे अख़बार हैंसिहर उठता हूँ निर्भया के दर्द को लेखकरसिहर उठता हूँ नारी-दुर्दशा को देखकर,कैसा आलम है, कैसा मौसम हैचारों ओर है बस … Read more

अब आ भी जाओ…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** बयारें चल गयी है देखो सुगंधी बसंती,मन में अजीब-सी हुक उठी है बसंतीयादों के काफिले चले हैं सुगंधी- सुगंधी,अब आ भी जाओ प्रिय ऋत आई बसंती। मेरे कितने फागुन लौट गए हैं बेरंगी,पर अबके ना चूकना प्रिया प्रीत रंगीप्यार की चासनी में दिल रंग-बिरंगी,बस अब कामना है तुम हो मेरी संगी। … Read more

अब आगाज़ करेगी

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… अब वह नहीं रुकेगी,उडना ही होगा उनकोआवाज दबाने वालों अब खामोश रहो,ये नारी शक्ति है, अब आगाज़ करेगी…। अपने लक्ष्य के लिए आगे बढ़ेगी,नहीं किसी से डरेगी अबबुलंद इरादों के साथ अपना वर्चस्व क़ायम करेगी,ये नारी शक्ति है, अब आगाज़ करेगी…। कब तक यूँ … Read more

नारी तू अनंत

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… नारी, तू नारायणी,सृष्टि की अनवरत संवाहिनीतेरी वेदना में हिमगिरि की धैर्यगाथा,तेरी करुणा में मंदाकिनी की अविरलता। तेरे चरण-स्पर्श से वसुधा विमल,तेरे तप से चंद्रमा शीतलतेरी ममता वटवृक्ष की छाया,तेरी चेतना में ब्रह्म की माया। वात्सल्य की सौम्यता में सरस्वती,शौर्य की गर्जना में चंडी हुंकारेकभी … Read more

साँस लेना भी मुश्किल

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** साँस लेना भी हुआ आज क्यूं मुश्किल मेरा,आज क्या हाल है या रब सरे महफ़िल मेरा। ग़म के सेहरा से जगा फिर मुझे मालूम हुआ,खो गया फिर कहीं वीरान में खुश दिल मेरा। तू थी मज़लूम ये क़ातिल ने भी माना आख़िर,जाने क्या सोच के रोता रहा कातिल मेरा। अब … Read more

मौत हो चुकी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** पत्तों की सरसराहट,उल्लू की कराहती आवाजलगता मृत्यु जीवन को गले लगाए बैठी। चाँद निकला बादलों से,सूखे दरख्तों सूखी नदियों नेओढ रखा हो धवल चाँदनी का कफ़न,जंगल कम, नदियाँ प्रदूषित हो सूखी।मानो ऐसा लगता,मौत हो चुकी पर्यावरण की॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई १९६२ को उज्जैन में जन्में … Read more

हो ज़िंदगी इश्क़ की

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* है इक हसीना परी-सी दिखे जो, मलिका वही हुस्न कीवो चाॅंद मेरा चकोरा बनूं मैं, हो ज़िंदगी इश्क़ की। जुल्फ़ें घटा-सी नजर है नशेमन, होंठ हैं पंखुड़ियाँ गुल कीसाकी न पैमाना उसको समझना, वो है फिरदौस दिल कीहर दिल अजीज़ वो नाजनीना गुल की तरह गुलाबी,रुसवा न हो चाॅंद मेरा … Read more

नारी तुम नारायणी हो

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** नारी तुम नारायणी हो,शक्तिपुंज हो,जीवनदायिनी होतुम सदा ही गतिमान हो,इसलिए तुम सर्वत्र विद्यमान हो। नारी तुम आद्यशक्ति हो,तुम किसी से डर नहीं सकतीऔर जग में ऐसा कोई काम नहीं,जो तुम कर नहीं सकती। तुमने तो देवों को भी गोद खेलाया है,अपने तपोबल से जग को समृद्ध बनाया हैतुम अबला कैसे हो … Read more

वेद और विज्ञान

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** विज्ञान की जो खोज,हमारे सामने आई हैवो पहले से ही हमारे,वेदों में समाई है। हम गलत पढ़ते हैं कि विमान,राईट ब्रदर्स ने था बनायाक्योंकि रामायण काल मेंहमने पुष्पक विमान को है पाया। हमारे वेदों में सारा,विज्ञान समाया हैवेदों का ही सारा ज्ञान,विज्ञान में आया है। अर्थवेद में चिकित्सा ज्ञान,समाया … Read more

पत्थर की चक्की होती थी…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* कैसे जीवन-यापन करते, क्या-क्या थे तब साज ?आओ कुछ ही सदी पुरानी, बात करें हम आजबिजली और मोटर ने किया, जीवन अब आसान,पुरखों ने संघर्ष बहुत किया, बच्चों लो यह जान। पत्थर की चक्की होती थी, हर घर एक न एक,जिसमें पिसते आटा-बेसन, रोटी खाते सेकढेंकी से कूटे जाते थे, छिलके लगे … Read more