धुआँ-धुआँ-सी नारी ज़िन्दगी
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सिहर उठता हूँ नारी-उत्पीड़न देखकर,दहल उठता हूँ नारी प्रति शोषण देखकरकहीं दहेज है, कहीं घरेलू हिंसा हैकहीं बलात्कार है,धुँआ-धुँआ-सी नारी ज़िन्दगी। कहीं जघन्यता के समाचार हैं,कहीं छेड़खानी से भरे अख़बार हैंसिहर उठता हूँ निर्भया के दर्द को लेखकरसिहर उठता हूँ नारी-दुर्दशा को देखकर,कैसा आलम है, कैसा मौसम हैचारों ओर है बस … Read more