उस पार… एक विलक्षण दुनिया

भागचंद ठाकुरकुल्लू (हिमाचल प्रदेश)******************************************** एक विलक्षण दुनिया,मनाली-लेह राजमार्ग पर दिखता है अटल टनल का मनमोहक नज़ारा,इसकी एक झलक पाने के लिए चला आता है जग सारापीर पंजाल श्रृंखला में बने हैं अटल सुरंग के दोनों छोर,एक विलक्षण दुनिया वास करती है रोहतांग के उस ओरसामरिक दृष्टि से सुरंग का निर्माण था बहुत ही ज़रूरी,भारत सरकार … Read more

वन-उपवन लहराए

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** सृष्टि रचयिता हो मस्त मगन,छटा बिखेर सर्वत्र लग्नकण-कण विराट स्वरूप,सृजन करता ध्यान मग्न। ऋतु सर्दी में सहमी धरा,लोहित तृण से झांकीपतझड़ में निज पत्र खोए,किसलय संग तरु खोए। वसुंधरा सर्व-सम्पन्न होकरवन-उपवन लहराए।अद्भुत सा स्वर नाद निकल,धरा ओ अम्बर चूमे। फूल-पत्र संग तरु झूले,बुरांस बसंती फूलेफुलकारी ओढ़नी ओढ़नववधू भू सजीले। शिवरात्रि … Read more

जीवन नश्वर, फिर क्यों अभिमान ?

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:सगण × ८+१… यह जीवन नश्वर है सबका, फिर क्यों करना इस पे अभिमान।जग में जिसने तन धार लिया, उसका तय निश्चित है अवसान।जग की यह रीत पुरातन है, हर जीव बना फिर भी अनजान।भव बन्धन में फ़ँसता रहता, उसको न रहे निज जीवन भान॥ विनती करना उस ईश्वर से, … Read more

सुकून दे रहा पेड़

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ दूर तक फैला हुआ यह पेड़,अपनी छाँव में सभी को समाहित कर रहा हैयह बड़ी-बड़ी झाड़ियों व टहनियों ले लदा हुआ पेड़,अपनी छाया से हम सभी को सुकून दे रहा है। इसी की तलाश में शहर-दर-शहर,घुमक्कड़ घूम रहे हैं पर यह नहीं मिलताजीवन के इस पल-दो-पल में हमें,अभी भी सुकून … Read more

सदाचार द्योतक चरित्र

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सदाचार द्योतक चरित, मानवीय आधार।नीति प्रीति सद् न्याय का, संस्कृति लोकाचार॥ शिक्षा द्योतक हो विनय, अनुशासन प्रतिमान।सुमति धैर्य मेधा सबल, पौरुष यश सम्मान॥ लोकतंत्र द्योतक प्रजा, सेवा देश समाज।सत्ता शासन तंत्र का, नव विकास आगाज़॥ शील धीर गंभीरता, द्योतक पौरुष तेज।देशभक्ति सम्प्रीति मय, दुराचार परहेज॥ दया क्षमा करुणा मदद, … Read more

मार्च आया, रंग हजारों लाया

सौ. निशा बुधे झा ‘निशामन’जयपुर (राजस्थान)*********************************************** गया अभी छोटा अल्हड़ फरवरी,आया देखो अब मतवाला मार्चफागुन मन लेकर खास,रंग अबीर, गुलाल बिसराए दुखों को खास। आया देखो मतवाला मार्च,रंग-बिरंगी होली परमारे ये भर-भर पिचकारी,भक्त प्रहलाद और होलिका की याद दिलाए गाथाएं। राधारानी बरसाना धाम,कृष्ण का अल्हड़पनगोपियों संग रास-रंग रचनाएं,पौराणिक परम्परा दोहराएं। आया मस्ताना मार्च,लाया अन्न धान्यलहर-लहराया … Read more

झरने-सा बहना तो सीखो

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* खेल तो अभी शुरु हुआ है,खिलाड़ी बन कर तो देखो। जीना तो अभी शुरू किया है,खुलकर जी कर तो देखो। सबेरा तुम्हें दस्तक दे रहा है,खिड़की से झांक कर तो देखो। शाम सुहानी, बीती बात पुरानी,नई कहानी बन कर तो देखो। अपने लिए बहुत जी लिए,सबको मदद करने का आत्मसात बनाओ। … Read more

शाश्वत सत्य

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** जन्म और मृत्यु,शाश्वत सत्य हैनहीं कोई इसकाविकल्प है। एक दिन सभी को,मृत्यु शय्या पर सोना हैचाहे आप हो या डॉक्टर,सभी का यह हाल होना है। जिसने जन्म लिया है,उसकी मृत्यु निश्चित होगी।किसी की आज तो,किसकी कल होगी। मृत्यु से आज तक कोई,जीत नहीं पाया है।जिसने भी लिया है जन्म,अवश्य … Read more

शिव क्षमा करो हर भूल

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)********************************** हे शिव! शंभू नाथ मेरे, शिवदासी करती वंदना,बैठ तुम्हारे श्रीचरणों में, पूरी हो हर साधना। शिव क्षमा करो हर भूल स्वयं को प्रकट करो,खींचो हिरदय हर शूल स्वयं को प्रकट करो। तुमरे प्रेम में मन बैरागी,चुनता भक्ति के फूल स्वयं को प्रकट करो। जागो शंभू भोर भई है,श्रद्धा झूले … Read more

मातृत्व से ही अस्तित्व

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अनुपम अपूर्व लेखन स्वतंत्र, मातृत्व सप्ताह सफल हैविविध कीर्ति कवि काव्य कला, माँ ममता लसिता निर्मल है। ममतांचल वात्सल्य समीक्षा, करना गणपति भी दुर्गम हैकैसे हम सम अज्ञान लोभ फँस, मातृ हृदय रचना संभव है। फिर भी फ़नकारों स्नेहिल रचना, स्वतंत्र लेखन पट रंजित हैधन्य पटल सारस्वत कविवर, जननी … Read more