रगों में भ्रष्टाचार

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* लहू के बदले,अब बहतामानव की,रगों में भ्रष्टाचार। हर एक सच्चा नर,हरदम सोचेंक्यूँ हुए सब,इतने भ्रष्ट। लहू के बदले,चाहना ले डूबाहर इंसान को,अच्छा-बुरे का भेद मिटाया। दिल ने मजबूर किया,इच्छा ने हैवान बनायाहर इन्सान को पर,मानव समझ न पाया। अपनी नियति,कब क्यूँ और कैसे ?दिल से मजबूर हुए,समझ न पाया मन। मन … Read more

शिव आए ब्याह रचाने

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** शिव आए पार्वती से ब्याह रचाने, संग में भूत-प्रेत बाराती बना लाएपार्वती की तपस्या आज रंग लाई है,उनके मुखड़े पर खुशियाँ छाई है। अब जाकर वो शुभ घड़ी आई है,जब उनके द्वार पर बजी शहनाई हैशिव के गले में नागों की माला,वो तन पर ओढ़े बाघम्बर छाला। मस्तक पर शोभे चंदा चक-मक,जटा … Read more

फागुन की मस्ती…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ वसंत की बहार के बाद,रंग-बिरंगा सा मौसम आयाजिसने दुश्मनों को भी दोस्त बनाया,यह त्योहार ही नहीं, फागुन की मस्ती है। झूमते-नाचते ढोलक की थाप पर,चाहे वनवासी हो, या शहरवासीसब मस्त हैं, मौसम का ऐसा जादू छाया,यह त्योहार ही नहीं, फागुन की मस्ती है। गली-मोहल्लों में फाग के गीतों का गुणगान … Read more

ईश्वर की लीला

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ कैसी है लीला ईश्वर की,किसी को फूल मिलेकिसी को काँटे मिले,एक झोली में फूल पड़े हैंएक झोली में काँटे हैं,कोई तो ईश्वर का कारण होगा। तेरे-मेरे बस में कुछ भी नहीं,यह सब तो बांटने वाला बांटे हैंकोई तो कारण होगा,पहले बनती है तकदीरेंफिर बनते हैं शरीर,यह तो उस भगवान की कारीगरी हैभला … Read more

वो प्यार, प्यार नहीं

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** प्यार है एक रूहानी एहसास,दिखावे का इसमें चलन नहींरोज़-डे, किस-डे, प्रपोज-डे,अपनी सभ्यता में प्रचलन नहीं। पति-पत्नी का प्यार अनोखा,यहाँ हरपल प्यार का होता हैदिल की धड़कन और उमंग,का कोई खास दिन न होता है। प्यार मांगता त्याग-समर्पण,नकली प्यार में नहीं मिलताजो जबरन डे पर थोपा जाए,वो प्यार, प्यार नहीं होता। यौवन को … Read more

मंदबुद्धि हूँ तो क्या हुआ ?

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** मंदबुद्धि हूँ तो क्या हुआ, दिल का तो साफ़ हूँ,किताबों की दुनिया में सही, जज्बातों में मैं पाक हूँधीरे सीखता हूँ, पर जो सीखता हूँ, याद रखता हूँ,हर चेहरे के पीछे, असली इंसान की पहचान रखता हूँ। माना कि मेरी राहें थोड़ी अलग हैं,तेज़ रफ़्तार दुनिया से थोड़ी पीछे हूँपर जो … Read more

शिव वंदना

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* महादेव शंभू त्रिपुरारी,शीश चंद्र जटा गंगाधारीॐ नमः शिवाय का जाप करूं,मैं शत शत तुम्हें प्रणाम करूं। तुम हो आदि अनंत महादेवा,कैलाश पर्वत पर है डेरागोद में गणपति संग में गौरा,शत-शत तुम्हें प्रणाम करूं। भस्मी रमाए अंग-अंग में,डम-डम डमरू बाज रहाहाथ त्रिशूल गले सर्पों की माला,शत-शत तुम्हें प्रणाम करूं। दुख की धूप में … Read more

दिल हमारा पल-पल टूटता

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** दिल हमारा पल-पल टूटता है,और सदियों से दिल ये रोता हैअंदर में हूक-सी उठती है,जैसे हर पल कुछ छूटता है। बाहर से बिल्कुल शांत होता है,पर अंदर में तूफान भरा होता हैसब-कुछ बिखरा-बिखरा होता है,जैसे सब-कुछ उजड़ा-उजड़ा होता है। कुछ पाने की चाहत होती है,कुछ खोने का ग़म भी होता हैइक दिन … Read more

गुन-गुन भँवर करे

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** अविरल सुख बरसे।बरबस यह हरसे॥मन रह-रह कहते।पुलकित तुम सरसे॥ सुरभित पवन बहे।कलियन मदन कहे॥दिन-दिन तुम खिलते।उपवन महक रहे॥ गुन-गुन कर भँवरे।मधु-रस सुलभ करें॥पुलकित मन कहते।मधुबन पुलक भरे॥ दुख जग सब हरने।करतब कुछ करने॥अवतरित जगत में।भगवन शुभ करने॥

कुछ ना कह सका

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आँखों में शब्दों को भरकर, होंठों तक भावों को लाया,धड़कन थम-सी गई अनहोनी, स्वर ख़ुद को भीतर रुकवायामन का दीप जलाकर भीतर, अनकही विचारों की पीड़ा,चुप्पी की ओटों में रखकर, जो यथार्थ सच दफ़नाया। मन कहने को बहुत सँजोया, दशा-दिशा पल भर में तोड़ा,डर ने राहों रोक दिया तो, … Read more