सत्य

डॉ.किशोर जॉन इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************** मौत की कगार पे खड़ा सत्य, मौत के बाज़ार में,इंतज़ार में l तार-तार हो चुके हैं कपड़े सत्य को ढकते-ढकते l ख़ून भी सारा बह चुका, झूठ की तलवारों से। पसीना भी सूख चुका, असत्य की बयारों से। जीभ भी कंपकंपाती है, प्रतिकार भी शक्तिहीन-सा लाचार अंधत्व-सा छा गया है, असत्य … Read more

अंतिम सफ़र

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* कभी ज़िंदगी के मेले देखे, कभी ग़मों के रेले देखे। जिंदगी के रंग हैं कई, कभी फीके,कभी तीखे देखे। ओ ओ ओ ओ ??? अभी कैसे कह दें अंतिम सफ़र, ओ मेरे हमसफर,हमसफ़र। जो हुए कुर्बान दे देश पे, वो सजे थे हर वेश में। क्या उनको पता था … Read more

काश

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- काश! मेरी माँ होती आज जिन्दा, तो माँ की गोद में सोता ये बन्दाl माँ बचपन की तरह ही दुलारती, आँचल में बैठा के खाना खिलातीl भले ही मैं बहुत खूबसरत नहीं, मगर टीका लगाना भूलती नहींl काश! फिर मुझे लल्ला कह पुकारती, बालों में तेल लगा कंघे से … Read more

हिमालय की वादियों में खो गए

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** हिमालय की वादियों में खो गये, आकर यहां सौंदर्य के ही हो गए। उन्नत शिखर हिम से ढकी सब चोटियां, सुंदर हवा सुख शांति अदभुत वादियां। देखते भी मन नहीं भरता इन्हें, देखकर सब छोड़ इनके हो गयेll लोग पूरे देश के आते यहां, पर्यटन व तीर्थ दर्शन कर यहां। … Read more

उन गलियों तक…

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** जिंदगी का सफर गलियों के बिना अधूरा-सा रहता है, हमारे बचपन के दिनों से लेकर आज इस उम्र तक उन गलियों तक… कहीं भी जाएं,कहीं रहे इक सपना पलता है, वापस आकर मन की गलियों में ठहरने लगता है, ये हमारे अकेलेपन के अपने साथी हैं, जो मन को बहुत सुकून … Read more

हार न मानी

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* मीरा दर्द न जाने कोये, जाने वही जो मीरा होये। बचपन प्रीत श्याम संग लागी, स्वप्न आँख श्याम संग सोई, भोर भई गिरधर संग जागी, राज की रानी प्रेम पुजारिन, पति रूप गिरधर को मानी, विरह वेदना बहुत सही है मगर मुख से न एक कही हैl राणा ने एक … Read more

दीवार

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* आँगन में दीवार देख कर सोच रही माँ खड़ी-खड़ी, रिश्तों में दरार पड़ गयी,आई है ये कैसी घड़ीl बचपन में संग खेला,तूने संग-संग की पढ़ाई, तू है मेरा प्यारा छोटा अव्वल आना भाई। लगता है अब टूट गई रिश्तों की नाजुक कड़ी, रिश्तों में दरार पड़ गयी,आई है ये कैसी … Read more

मधुर मुलाकात से

सोनू कुमार मिश्रा दरभंगा (बिहार) ************************************************************************* यह दृश्य बड़ा ही अप्रतिम जब मिल गए प्रिया-प्रीतम, सुशोभित हो रही सुचिता हर्षित हो रही यह वसुधा, तुम्हारे मुख की मुदित मुस्कान से प्रिया प्रियतम की मधुर मुलाकात से। हर्षित कोयल राग मिलन के गाये मोर-पपीहा देखो नृत्य दिखाये, हृदय उमंग से होता लक्षित जब प्रीत प्रणय होती … Read more

आजादी के सपने

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* आज, आजादी के लिए कुर्बान होने वाले सेनानियों के सपने साकार हो रहे हैं। जो गुलामी की जंज़ीरों को तोड़कर, लाना चाहते थे देश की खुशहाली। मिल गई उनको उनके देश की आजादी, गूँज उठी उनके बच्चों की फिर से किलकारी। देश की तरक्की में जो काम अधूरा रह गया था, … Read more

इश्क़ का नशा…

अलका जैन इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** ख़त लिख-लिख के आने का वादा किया यार ने, हम इंतजार कर-करके थक गये दोस्त चिठ्ठी फिर बांची बहुत बार बांची, कहीं पैगाम गलत तो नहीं समझा हमने यार तो नसीब न हुआ चिठ्ठी रह गई हाथ में, मेरे प्यार में तो कमी नहीं थी कैसे यार दगा कर गया इश्क … Read more