संघर्ष लड़कियों का…
बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** चुप्पियों की गठरी बांधती है,सपनों की पोटली कंधे रखती है। हर सुबह वह निकल पड़ती है,नजरें झुकाती है, हौसले ऊँचे रखती है। घर की देहरी से दुनिया तक,टोकने की उसके लम्बी कतार होती है। कभी ‘यह मत करो’ कभी ‘वह मत करो’दुनिया कहती है, कभी ‘इतना काफी है’ कह कर रोकती है। … Read more