भारत की नारी

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************** नारी और जीवन (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस)…. जाग उठो भारत की नारी,अत्याचार मिटाने को।झाँसी की रानी बन जाओ,फिर तलवार उठाने को॥ करो सामना डरो नहीं तुम,हिम्मत अब तो दिखलाओ।दानव बन कर घूम रहे जो,सबक उन्हें भी सिखलाओ॥कूद पड़ो तुम रणचण्डी बन,अपनी लाज बचाने को।जाग उठो भारत की नारी… मर्दानी बन लड़ना … Read more

सुरभित करती मानव जीवन

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* नारी और जीवन (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस)…. सुरभित करती मानव जीवन,धरती वर वरदान है।सभी धुरी माँ केन्द्र धरा पर,नारी ही शुभ शान है॥ दिव्य किरण का तेज ओज वो,ईश्वर का अभिदान है।प्रथम शब्द से रहे अलंकृत,श्रेष्ठ ध्येय अरु ज्ञान है॥ तपोभूमि है मन नारी का,करती हर क्षण त्याग है।फलीभूत परिवार वहीं जो,नारी … Read more

महाशिवरात्रि

दिनेश कुमार प्रजापत ‘तूफानी’दौसा(राजस्थान)***************************************** शिवरात्रि विशेष…. नीलकंठ भोलेनाथ,गंगाधर गौरीनाथ।मन में हे! पशुपति,आशा बन जाइये॥ होवे नहीं बुरे काम,होवे रोज अच्छे काम।मेरे नयनों की तुम,छवि बन जाइये॥ छाई जग में निराशा,तुम से ही बस आशा।नफरत का जहर,तुम ही पी जाइये॥ करो विश्व का कल्याण,मेरे प्यारे विश्वनाथ।महा शिवरात्रि पर,वास कर जाइये॥

महादेव वंदन

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** सरसी छंद आधारित…. करता वंदन महादेव की,आशुतोष भगवान।दीनानाथ दया के सागर,शंभू कृपानिधान॥ तेरी महिमा जग में न्यारी,विपदा हरिए नाथ।हे करुणानिधान कंसारी,योगी भोलेनाथ॥कैलाशी हे घट-घटवासी,शंकर दयानिधान।दीनानाथ दया के सागर, शंभू कृपानिधान…॥ त्रिशूलधारी त्रिकालदर्शी,त्रिगुण त्रिलोकीनाथ।त्रिरूपधारी त्रितापहारी,हे विश्वंभरनाथ॥त्रिनेत्रधारी त्रिपुंडधारी,कैलाशी दो ज्ञान।दीनानाथ दया के सागर,शंभू कृपा निधान॥ श्रीगंगाधर चंद्र माथधर डमरु करे निनाद।पन्नगभूषण मृगछाला तन,समाधिस्थ … Read more

माँ सरस्वती

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* हंसवाहिनी शारदे,मातु हमको तार दे।वीणापाणि सरस्वती,अज्ञान मिटाइए॥ विद्यादायिनी तारिणी,मात पुस्तकधारिणी।बुद्धि बल शक्तिदाज्ञान लौ जलाइए॥ धवल वस्त्रधारिणी,मात अज्ञानहारिणी।दिव्यालंकारभूषिता,सुख बरसाइए॥ कवि रचना संसार,अद्भुत और अपार।इसमें सुख वास है,दु:ख को मिटाइये॥ नाना इसके रूप है,कवि सृष्टि अनूप है।विधि की सृष्टि से बड़ा,डुबकी लगाइए॥ है ईश सृष्टि अपूर्ण,कवि सृष्टि परिपूर्णनव रस से सुंदर,कलम चलाइए॥ कवि … Read more

महान स्वर्ग से मही

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* वसुंधरा पुकारतीबढ़े सुवीर भारती।बढे चलो,बढ़े चलोसुशांति को विचार लो॥ महान स्वर्ग से महीसदैव पूज्य ही रही।करें सदैव आरतीयही हमें सँवारती॥ करें सभी सुकर्म हीतजें सभी अधर्म ही।सदैव चित्त शुद्ध होसभी सुखी समृद्ध हो॥ मिटे न ज्ञान मर्म हीयही बने सुधर्म ही।रहे कहीं न दीनतादिखे कहीं न हीनता॥ सदैव भ्रातृ भाव होन … Read more

जन गण मन की जीत हो

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)**************************************** गणतंत्र दिवस विशेष…. जन गण मन की जीत हो,जय हो भारत देश।चलो मनाये साथियों,ये गणतंत्र विशेष॥ ये गणतंत्र विशेष हो,भारत की जयकार।जनमानस में चेतना,मिले सभी अधिकार॥ मिले सभी अधिकार वो,सबका होवे न्याय।साथ-साथ मिलकर चलें,कोई छूट न पाय॥ शान तिरंगे की बढ़े,कभी न झुकने पाय।नील गगन की छाँव में,लहर-लहर लहराय॥ अमर … Read more

महापर्व गणतंत्र दिवस

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* गणतंत्र दिवस विशेष….. महापर्व गणतंत्र,चलो शुभ दिवस मनाएँ।जनगण सुंदर गान, सभी मिलजुल कर गाएँ॥भारत का अभिमान, मान अरु शान तिरंगा।श्रेष्ठ यहाँ का नीर,जहाँ बहती माँ गंगा॥ तीन रंग का श्रेष्ठ,चलो झण्डा फहराएँ।आजादी के नाम,सभी नित माथ झुकाएँ॥जो है अमर शहीद,सभी को शीश नवाएँ।यह धरती की शान,गीत वंदे सब गाएँ॥ जय जय … Read more

मातृ वंदना

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* मातृ वंदना प्रथम करूँ मैं,जन-जन का अभिमान है।जन्म धरा है इस माटी में,जीव जगत की शान है॥ शुभ किसान जो अन्न उपजाते,वंदन उनको कीजिए।अमर शहीदों की गाथा को,मस्तक पर नित लीजिए॥ लहू वतन पर यहाँ दिया है,करते शुभ गुणगान है।इस मिट्टी में यमुना गंगा,नदियाँ सारी जान है॥ मातृभूमि को शीश नवा … Read more

नारी

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** रचनाशिल्प: प्रत्येक चरण में ५+५=१० मात्रा… तुम नार अभिजात,गृह सेवा दिनरातकरे उफ न थकान,अधर पर मुस्कान। न कोमल कमल कली,वह वज्र हिय पलीछू पीर भामिनी,प्रेरणा स्वामिनी। नवभाव अनुभूति,रच सृजन प्रसूतिकभी शिशु व वनिता,कभी रच सुकविता। कभी थी खिलाड़ी,कहाती अनाड़ीनिपुण थी नृत्य जो,बनी गृह भृत्य वो। मायका गुनभरी,ससुराल अधखरीस्त्री सदा अनमोल,बोली न कटु … Read more