हमारे रहोगे दयानाथ हे

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ हमारे रहोगे दयानाथ हे।कृपासिंधु तुम हो जगन्नाथ हे।तुम्हारे सहारे लगी आस है।तुम्हारा जपूँ नाम विश्वास है॥ बनाए तुम्हीं ने दिवस रात हैं।सितारे गगन में चमकते रहें।कुसुम बाग में खिल महकते रहें।फुदककर कबूतर चहकते रहें॥ करूँ वंदना हाथ जोड़े हुए।लिए आस मन में संजोए हुए।धरो लाज मेरी महादेव हे।दुखी-दीन मैं हूँ दयासिंधु … Read more

सरस्वती महिमा

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ करूँ नमन कर जोड़,ज्ञान की देवी माता।सरस्वती का गान,मधुर विद्या माता का।दया करो हे मातु,विमल मन उज्जवल कर दो।सदा ज्ञान की धार बहे,माता यह वर दो॥उज्ज्वल ज्ञान प्रकाश दो,माता वीणावादिनी।अज्ञान तम मन से मिटा,हे माँ,शुभ वरदायिनी॥ परिचय–डॉ.धाराबल्लभ पांडेय का साहित्यिक उपनाम-आलोक है। १५ फरवरी १९५८ को जिला अल्मोड़ा के ग्राम करगीना … Read more

विनय कर भाग्य जगाओ

मनोरमा चन्द्रारायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************* करूँ ईश गुणगान,विनय कर साँझ-सवेरे।कृपा करो श्रीनाथ,द्वार हैं आए तेरे॥करते भक्त पुकार,हृदय में आस जगाएँ।करें कामना पूर्ण,सभी शुभ फल को पाएँ॥ विनय भाव मन धार,कृत्य अनुपम ही करना।राग-द्वेष को छोड़,नीर सम निर्मल बहना॥दुनिया माया जाल,मोह में कभी न पड़ना।इसका रूप विशाल,बचे तुम जग में रहना॥ आज करें अरदास,देश की गाथा गाएँ।मंदिर जाकर रोज,देव … Read more

युद्ध नहीं है धर्म हमारा

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ रचना शिल्प:३० मात्राएं,१६,१४ पर यति….. युद्ध नहीं है धर्म हमारा,शांति चाहने वाले हैं।छेड़ा अगर किसी ने तो हम,नहीं छोड़ने वाले हैं॥ चिंगारी को छेड़ोगे तो,ज्वाला बने मिटा देंगे।यदि फिर से टकराओगे तो,हम टुकड़े कर डालेंगे॥ अरे दुष्ट! तेरी यह हरकत,सफल नहीं हो पाएगी।तेरी सारी गीदड़ चालें,डर-डर कर थर्राएंगी॥ माह फरवरी चौदह … Read more

बसंती अति मन भावन

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************** वसंत पंचमी स्पर्धा विशेष ….. माघ बसंती अति मन भावन,सुन्दर सुखद निराली है।आम्र बौर की झुकती डाली,कोयल भी मतवाली है॥ जन्मदिवस माँ सरस्वती का,ऋतु बसंत की बेला है।तिथि पंचम शुभ दिन है आई,फूलों वाला मेला है॥ज्ञान बाँटती सप्त स्वरों की,शारद भोली भाली है।माघ बसंती अति मन भावन… दुल्हन जैसी ओढ़ … Read more

हूँ नन्हीं चिड़िया

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* मैं हूँ नन्हीं सुंदर चिड़िया,वृक्ष एक आधार।मनुज छीनता आज देख लो,नित मेरा घर बार॥ जब-जब नीड़ बनाती हूँ मैं,घर जाता है टूट।धन का लालच हृदय बसाकर,चैन रहे हैं लूट॥ पीड़ा मुझको भी होती है,समझो मेरा मर्म।मूक सदा रहकर भी सुन लो,सदा निभाती धर्म॥ घर की चाहत जैसा रखते,वैसी मुझको आस।वृक्ष काटकर … Read more

हरिभक्ति

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ************************************** अँधियार चारों ओर बिखरा,सूझता कुछ भी नहीं।उजियार तरसा राह को अब,बूझता कुछ भी नहीं॥उत्थान लगता है पतन सा,काल कैसा आ गया।जीवन लगे अब बोझ हे प्रभु,यह अमंगल खा गया॥ हे नाथ,दीनानाथ भगवन,पार अब कर दीजिए।जीवन बने सुंदर,मधुरतम,शान से नव कीजिए॥भटकी बहुत ये ज़िन्दगी तो,नेह से वंचित रहा।प्रभुआप बिन मैं था … Read more

माता,भर दो नव विश्वास

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* करूँ वंदना शारद माँ की,करती हूँ यह आस।नेक सृजन का पथ हो माता,भर दो नव विश्वास॥ जनहित का उद्धार करे हम,सृजन गढ़े अनमोल।शब्द शब्द में सार समाये,मन जाए नित डोल।हृदय भाव की अभिव्यक्ति से,फैले नित्य उजास।करूँ वंदना शारद माँ की,करती हूँ यह आस॥ लेखन में भाईचारा हो,प्रेम भाव का सार।लेखन से … Read more

जग जननी

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ रचना शिल्प: मात्रा २८, १६-१२ पर यति,चरणांत दो गुरु,पवर्ग का निषेध,अधर नहीं लगने हैं। जग जननी अर्चन कर तेरा,चरनन शीश नवाऊँँ।दर्शन अर्चन तेरा करके,तेरे ही गुण गाऊँ॥ जीव जगत जननी जगदीश्वरि,जीवन रक्षा कर दो।दया दृष्टि दीनन के दु:ख हर,संकट सारे हर दो॥ रहें स्वस्थ जो जहाँ भी रहें,जीवन में सुख होवे।धरा … Read more

तिरंगा प्यारा

कन्हैया साहू ‘अमित’भाटापारा (छत्तीसगढ़)*********************************** गणतंत्र दिवस स्पर्धा विशेष………. नीलगगन पर आज,लहर लहराय तिरंगा।तन-मन जीवन दान,त्याग सिखलाय तिरंगा। अति अकूत अनमोल,अतुल अपनी आजादी।अवनी से आकाश,अखिल अक्षय यह वादी।गणनायक गणतंत्र,गर्व की गौरव गाथा।भारत भरणी भूमि धूल लग दमके माथा।रक्षक सक्षम शैल,हिमालय कंचनजंगा।नीलगगन पर आज,लहर लहराय तिरंगा।तन-मन जीवन दान,त्याग बतलाय तिरंगाll संविधान सहकार,सचेतक सबल सजीला।कर्म और अधिकार,एक ही … Read more