हमारे रहोगे दयानाथ हे
डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ हमारे रहोगे दयानाथ हे।कृपासिंधु तुम हो जगन्नाथ हे।तुम्हारे सहारे लगी आस है।तुम्हारा जपूँ नाम विश्वास है॥ बनाए तुम्हीं ने दिवस रात हैं।सितारे गगन में चमकते रहें।कुसुम बाग में खिल महकते रहें।फुदककर कबूतर चहकते रहें॥ करूँ वंदना हाथ जोड़े हुए।लिए आस मन में संजोए हुए।धरो लाज मेरी महादेव हे।दुखी-दीन मैं हूँ दयासिंधु … Read more