बेलगाम बोलने-लिखने पर रोक

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* सर्वोच्च न्यायालय ने वेब पोर्टल्स और यू ट्यूब चैनलों पर चल रहे निरंकुश स्वेच्छाचार पर बहुत गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि संचार के इन माध्यमों का इतना जमकर दुरुपयोग हो रहा है कि उससे सारी दुनिया में भारत की छवि खराब हो रही है। देश के लोगों को … Read more

हिंदी के साहित्यकार कब आत्मचिंतन करेंगे ?

निर्मलकुमार पाटोदीइन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************************** मेरा हिंदी जगत से जुड़े सभी साहित्यकारों से सीधा प्रश्न है कि वे बताएं कि उनकी रची कृतियों का प्रकाशन कितनी संख्या में होता है ?कम से कम पांच सौ,तीन सौ। ऐसे भी कितने हैं जिनकी कृतियों का प्रकाशन १ लाख,५ लाख अथवा १० लाख संख्या में होता है। क्या इस विषय में … Read more

विलुप्त होता शिक्षक धर्म

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)*************************************** शिक्षा-ज्ञान एक ऐसा दीपक है,जिसके द्वारा कभी अन्धकार नहीं मिलता या होता है। ज्ञान रुपी प्रकाश से अज्ञानता विलीन होती है। शिक्षा या ज्ञान का महत्व हर युग में बहुत रहा है,इसलिए ज्ञान की देवी सरस्वस्ती पूज्यनीय हैं। पहले गुरुकुल में जाकर ज्ञान प्राप्त किया जाता था,चाहे सामान्य विद्यार्थी हो या राजकुमार हो। … Read more

काबुलःभारत करे नई पहल

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* काबुल हवाई अड्डे पर हुए हमले के जवाब में अमेरिका ने २ हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की थी कि वे उन हत्यारों को मारे बिना चैन नहीं लेंगे। अभी तक यही पता नहीं चला कि जो ड्रोन हमले अमेरिका ने किए हैं,वे किन पर किए हैं और उनसे मरनेवाले कौन … Read more

‘जातिवार जनगणना’ अब नया ‘खेल’ होगी ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** देश में जातिवार जनगणना का मानस बनाने के लिए जिस सुविचारित ढंग से चालें चली जा रही हैं,उससे साफ है कि आगामी चुनावों का यह मुख्य मुद्दा होगा। इसकी डुगडुगी घोर जातिवाद में पगे बिहार से बजना स्वाभाविक ही था। एनडीए का हिस्सा रही जद यू और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार … Read more

प्रतिस्पर्धा,प्रतिष्ठा और प्रदर्शन के लिए कितनी अमानवीय हिंसा…

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ******************************************* शुरू से ही मानव ने विकास किया और उसके पास मति-बुद्धि-विवेचना-ज्ञान का होने से अजीर्ण होना शुरू हुआ और वह विवेक हीन होना शुरू हुआ। मानव का विकास में मानवीय गुणों का होना अनिवार्य है,अन्यथा वह जानवर से भी बुरा है। साक्षर जब बिगड़ता है,तब वह राक्षस बन जाता है। मानव … Read more

अनमोल मोती

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)****************************************** रक्षाबंधन विशेष……… ‘रक्षाबंधन’ के सिर्फ २ दिन बचे थे,कमला बड़ी उदास थी कि वह इतनी दूर जाकर बेटी को कैसे लाए ? उसका १० साल का बेटा हर्षित कई बार पूछ चुका था कि माँ दीदी आएगी न ? रक्षाबंधन पर ? मुझे दीदी से राखी बंधवाना है,मुझे दीदी की बहुत … Read more

काबुलःभारत की बोलती बंद क्यों ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* काबुल पर तालिबान का कब्जा होने ही वाला है लेकिन म आश्चर्य है कि हमारा प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय और गुप्तचर विभाग आज तक सोता हुआ क्यों पाया गया है ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से बहुत लंबा-चौड़ा भाषण दे डाला और १५ अगस्त को जिस समय उनका भाषण चल … Read more

अफगान को चाहिए मानवता का प्रकाश

ललित गर्गदिल्ली ************************************** विश्व मानवीय दिवस-१९ अगस्त विशेष………… प्रतिवर्ष १९ अगस्त को मनाया जाने वाला ‘विश्व मानवीय दिवस’ इस वर्ष अफगानिस्तान में हुई तालीबानी अमानवीयता,क्रूरता एवं बर्बरता की घटनाओं से जुड़े अनेक प्रश्नों को खड़ा करता है। अफगानिस्तान का लगभग अठारह वर्षों तक अमेरिकी एवं मित्र देशों के साये में जद्दोजहद के बाद फिर अंधेरे … Read more

जननी तुल्य मातृभूमि

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** ‘मैं और मेरा देश’ स्पर्धा विशेष…….. अनेक विविधताओं से भरे हुए मेरे प्यारे भारत देश की संस्कृति बहुरंगी है क्योंकि यहाँ हिन्दू, मुसलमान,ईसाई,सिख,जैन,बौद्ध आदि विभिन्न संप्रदायों के लोग रहते ही नहीं,बल्कि सभी अपने अपने धर्म के अनुसार रीति-रिवाज,पहनावा,खान-पान और मान्यताओं के अनुसार व्यवहार करते हुए एक राष्ट्र के संविधान में आस्था … Read more