जड़ें, जोड़े रखती हैं हमें

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)************************************ मनुष्य का सबसे पहला संसार उसका परिवार होता है। यहीं से वह बोलना और चलना ही नहीं, जीना भी सीखता है। परिवार केवल खून का रिश्ता नहीं है, यह नैतिकता की पहली प्रयोगशाला है, जहाँ प्रेम बीज की तरह बोया जाता है और विश्वास वटवृक्ष की तरह पनपता है। आज जब … Read more

दिल को केवल धड़कने नहीं, स्वस्थ रहने दें

ललित गर्गदिल्ली**************************** विश्व हृदय दिवस (२९ सितम्बर) विशेष… ‘हृदय’ केवल शरीर का एक अंग नहीं, जीवन की धड़कन है। जब तक दिल धड़कता है, तब तक जीवन में उम्मीद, संवेदना, प्रेम और कर्म की संभावनाएं बनी रहती हैं। लेकिन विडंबना यह है कि आधुनिक सभ्यता ने जीवन को सुविधाजनक तो बनाया है, पर स्वस्थ और … Read more

ए.आई. साक्षरता:भारत पर्याप्त कदम उठा रहा ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** एक समय था जब अपना नाम लिख लेना ही साक्षरता मानी जाती थी। फिर कम्प्यूटर चलाना सीखना साक्षरता बन गया। आज साक्षरता का मतलब फिर बदल रहा है। अब यह देखना जरूरी है, कि क्या हमारा नागरिक ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (ए.आई.) को समझता है, उसका सही उपयोग कर पाता है और उसके … Read more

हिंदी के बढ़ते कदम से बेहतर उम्मीद

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी दिवस भारतीय दूतावासों और विदेशों में स्थित शैक्षणिक संस्थानों में विशेष रूप से मनाया जाता है, ताकि गैर हिंदी भाषियों को हिंदी भाषा के साथ जोड़ा जा सके। ‘विश्व हिंदी दिवस’ हमें अपनी भाषाई जड़ों पर गर्व करने और वैश्विक मंच … Read more

तारीफ की अहंकारिता… बचिए

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)**************************************** हम अक्सर महसूस नहीं करते हैं, पर तारीफ़ में भी अहंकार छिपा होता है। हम अक्सर यह सोच कर खुश हो जाते हैं कि हमें तारीफ मिली है, पर हर तारीफ अच्छी तारीफ नहीं होती। उसके पीछे कहीं न कहीं एक झूठ छिपा होता है। तारीफ सुनने की चाहत कहीं न कहीं … Read more

यूपीआई शुल्कःबाजार की कमाई से अधिक महत्वपूर्ण ’उपभोक्ता विश्वास’

ललित गर्गदिल्ली***************************** भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में यूपीआई केवल भुगतान का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि वह रोजमर्रा के आर्थिक व्यवहार का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सब्जी वाले से लेकर बड़े कारोबारी तक, टैक्सी से लेकर ऑनलाइन खरीददारी तक और घरेलू लेन-देन से लेकर व्यावसायिक भुगतान तक-यूपीआई ने पैसे के लेन-देन की आदत, … Read more

क्या ‘कृत्रिम मेधा’ मानव के नियंत्रण से बाहर होगी ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** ‘कृत्रिम मेधा’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से विकास किया है, उसने मानव समाज के सामने एक ऐसा प्रश्न खड़ा कर दिया है, जिसका उत्तर देना अब केवल वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी नहीं रह गया है। सवाल है—क्या कृत्रिम मेधा एक दिन मानव के नियंत्रण से बाहर निकल … Read more

दुनियादारी

राधा गोयलनई दिल्ली************************************ ‘दयाहीनं निष्फलं स्यान्नास्ति धर्मस्तु तत्र ही।ऐते वेदा अवेदा: स्युर्दया यत्र न विद्यते॥’  यानी बिना दया के किए गए काम में कोई फल नहीं मिलता। ऐसे काम में धर्म नहीं होता। जहाँ दया नहीं होती, वहाँ वेद भी अवैध हो जाते हैं। इसी सोच और संकल्प के साथ राजकोट से २२२२ किलोमीटर दूर … Read more

विवाह क्यों नहीं करना चाहते आज के युवा ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** पिछले एक दशक में भारत में विवाह को लेकर जो आंकड़े आए हैं, वे व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि बड़े प्रामाणिक शोधों पर आधारित हैं। पहला बड़ा शोध यूजीओवीटी-एम आईएनटी-सीपीआर मिलेनियल सर्वे है, जिसमें २० से ३५ साल के ७३९८ युवाओं से बात की गई। इस सर्वे ने बताया कि हर ४ … Read more

हिंदी दिवस’:जब तक रोग का सही इलाज नहीं होगा, कुछ नहीं बदलेगा

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************* विश्व में जितनी संस्थाएं हिंदी की सेवा के लिए बनी हुई हैं, उतनी संस्थाएँ किसी अन्य भाषा के लिए नहीं हैं। जितने संवैधानिक प्रावधान, अधिनियम, नियम आदि और संसदीय समिति सहित तरह-तरह की समितियां, संगठन और हिंदी के विकास व प्रसार के लिए संघ सरकार और विभिन्न राज्यों में भाषा के लिए पूरे … Read more