गिरगिट

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)****************************** दोनों दरख्त उदास होकर चारों ओर देख रहे थे। कुछ देर पहले परेड ग्राउंड, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और जनता से भरा हुआ था, पर अब वहाँ चारों ओर पानी के खाली पाउच, पूड़ी-सब्जी के खाली पॉलिथिन इधर-उधर बिखरे पड़े थे।“भाई बरगद ! हमने यहाँ कितने ईमानदार जनसेवकों के भाषण सुने। … Read more

इंसानियत की देवी

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तेज आंधी चल रही थी, अब धीरे-धीरे बारिश भी होने लगी थी, बीच-बीच में जोर से बिजली कड़क रही थी और मेरा मन डर के मारे बैठ जा रहा था कि बिजली भी गोल हो गई। ऐसे वक्त में अचानक एक कीड़ा, जो मुझे दिख नहीं रहा था ने मुझे डंक … Read more

जब तक है जान… माँ

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* “ओह…जल्दी गाड़ी निकालो न, ट्रेन आने में बस आधा घंटा बाकी है, राहुल थका-हारा आएगा और हम नहीं पहुंचे तो कितना परेशान होगा..? सुबह ८ बजे से अपने कॉलेज हॉस्टल से निकला हुआ है”। चिंतित राधिका ने अजय से कहा।“बस…बस, तुम आओ, मैं रेडी ही हूँ”, कहते हुए अजय गैराज की … Read more

परिवार का अपना हो

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ८० वर्षीय गायत्री जी विशाल जर्जर कोठी के एक हिस्से में अपने पुराने नौकर दीनू काका और उनकी बेटी सुमित्रा के साथ रहती हैं। लगभग १ महीने पहले उनके शरीर का आधा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया है। उसके बाद से वह अपना काम भी नहीं कर पातीं… पैसा तो बैंक में उनके … Read more

बारिश और बचपन

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ निया ऑफिस से निकली कि स्कूटी स्टार्ट करते ही बादलों की रिमझिम से उसका मन भीग कर बचपन में पहुँच गया था। जब बारिश में अपने संगी साथियों के साथ भीगना, झूला झूलना, गीत गाना और डांस करना उसका सबसे प्रिय काम था। उन्हीं यादों में खोया हुआ उसका मन उल्लसित एवं … Read more

बदनाम गली का घर

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ “मिहिर, मैंने आपके कपड़े और टिफिन बैग में रख दिए हैं।”उसने आँखों ही आँखों में प्यारी पत्नी मानी को अपनी कोठरी के अंदर आने का इशारा किया और उसके अंदर आते ही उसे अपनी बाँहों में भर लिया था… “मानी तुझे छोड़ कर जाने का बिल्कुल भी मन नहीं करता, लेकिन मेरी … Read more

मीठी-सी छुअन

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ मीति और मधुर बचपन से एक ही स्कूल में पढ़ते थे। फिर मधुर के पिता का निधन हो गया तो वह सरकारी स्कूल में पढ़ने लगा था, परंतु गाहे-बगाहे मीति से उसकी नजरें मिल ही जातीं और दोनों के चेहरे पर अनायास मुस्कुराहट आ ही जाती। दोनों ने कॉलेज में एडमिशन ले … Read more

मन्नत

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** राज एवं रश्मि पति-पत्नी थे।दोनों का दाम्पत्य जीवन अच्छी तरह से चल रहा था। एक दिन किसी बात पर राज और रश्मि की लड़ाई हो गई। इस वक्त रश्मि ने कहा-“मैं मायके जा रही हूँ।”रश्मि के ये शब्द सुनकर राज ने कहा-“तुम मायके जा रही हो, तो मैं मंदिर … Read more

जेठ की धूप

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ जेठ महीने की चिलचिलाती धूप में पसीने से लथ-पथ सरला सिर पर ईंट रख कर ढो रही थी। आज कई दिनों के बाद उसे काम मिला था। पेट की आग जो न करवाए, वह थोड़ी है। ६ वर्षीय मुन्नी अपने ३ वर्षीय भाई नन्हें छुट्टन के साथ पेड़ की छाँव में बैठी … Read more

कुसुमलता

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** ‘कुसुमलता’ नाम था उसका,पूरी सोसायटी में कोई ऐसा नहीं था, जिसे उसका नाम न पता हो।वो थी ही ऐसी, साफ-सुथरे कपड़े पहनती, सबका यथायोग्य आदर करती, सब उससे बहुत खुश रहते।बस उसकी एक आदत सबको बहुत परेशान करती है, वह यह कि वो अपने पास मोबाइल नहीं रखती। इससे सभी को कठिनाई … Read more