‘तीमारदारी’ मन का उपहार
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रोगी मन जब टूटता, जग छूटे हर आधार,सेवा का कोमल स्पर्श दे जीवन विस्तारममता की छाया चुपचाप नवशक्ति भर देती,सूने जीवन-निकुंज पर फिर खिलती नव बहार। रात-रात भर जागकर, रखते दवा का ध्यान,चेहरे पर धीरज धरकर, बाँटे मधुरिम मानकरुणा भरे दो बोल सदैव संबल बन जाते,तीमारदारी प्रेम सुधा बन … Read more