खिला है मोगरा
संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* धुंध गंध फैला मकरंद कहाँ खिला है ये वनचरा,अपने ही छंद बन आनंदकंद खिला है मोगराउंडेल कर सुगंध हवा जो मंद उत्तान खिला है मोगरा,पसरा मकरंद हवा के छंद धुंध-सा खिला है मोगरा। पी कर गंध धुंध खिला मन रंध्र-रंध्र ये कौन वसंत ?अपनी ही धुन में गा रहा छंद-छंद प्रकृति … Read more