कौन सुनेगा मेरी ?
राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** रफ्ता-रफ्ता ज़िंदगी की राह पर चलता रहा,हर कदम पर मेरा अपना ही मुझे छलता रहा। किससे करने जाएँ शिकायत, कौन सुनेगा मेरी ?जब मेरे अपनों ने, इज्जत तार-तार की मेरी। सब हो गए पराए, समझा था जिनको अपना,जो स्वप्न देखता था, वो बन गया है सपना। इज्जत की धज्जियों को, थामा था … Read more