समावेश करें

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ आओ इस नये युग में,नवाचार सृजन की कामना करेंबुराईयों से दूर रह कर,नव प्रभात की बेला मेंएकजुटता के इस समावेश में आगे बढ़ें। वैचारिक मंथन के विचारों में,शब्दों के इस चिंतन मेंसंवाद की गरिमा को बताते हुए,इस युग में नये समावेश का जयघोष करें। कभी खत्म ना हो मैत्री भाव … Read more

हवा से ही हमारी हवा

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** आज जागतिक हवामान दिन है,हम सब और कुछ नहींबस हवा में पलती मीन हैं। हवा से ही तो हमारी हवा है,हवा से ही तो हम जवां हैंये हवा नहीं रही तो, हम हवा हो जाएंगेहवा हो गए तो फिर क्या पाएंगे ?हम हवा न हो जाएँ इसलिए,हवा को बचाना होगाहमारी हवा … Read more

मैं और तुम

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मैं और तुम थे अलग-अलग,पता नहीं! कब और कैसेएक हो गए, हम हो गए…,वक्त के साथ चलते रहेसाथ-साथ एक पटरी पर,समानांतर रेल की तरह। एक दिन अचानक,यह अहसास दिलाया तुमनेसमानांतर का अंतर शायद,हमारे बीच जैसे कहीं बढ़ रहा होकहीं मुझसे कोई गलती हो गई,या तुम ही खुद गलती कर बैठे। फिर … Read more

व्यवस्था ही अब लंगड़ी!

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** चोरों की करते शिकायत जिनसे,वे खुद भी चोरों से मिले हुए हैंमाजरा समझ में आने लगा है कि,चोरों के चेहरे क्यों खिले हुए हैं ? शिकायत जो करते हैं वे सच कहते हैं,पर शिकायत सुनने वाले कहाँ सुनते हैं ?जिनकी की है शिकायत दुखियारे ने,उनका झूठ भी सच जैसा ही सुनते … Read more

बतलाती मन का दर्द

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कविता कहाँ से निकली है ?यह प्रश्न अगर पूछे कोईक्या उत्तर देना बताती हूँ,,यह बात तुम्हें समझाती हूँ। मन के अन्दर कुछ उमड़ रहा,बाहर आने को मचल रहाकैसे रच काव्य में ढाल रहा,मन के भावों को निकाल रहा। बात कभी दिल की कहती,धीरे-धीरे कविता बढ़तीबतलाती मन की पीड़ा का दर्द,वह हृदय के … Read more

विन्ध्यअर्भा-क्षिप्रा

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** क्षिप्रा प्रिय तटिनी, अमृतधारिणी, जलवाहिनी,धरागर्भा विन्ध्यअर्भा पतितपावन ओ! प्रवाहिनीमालव प्रदेश सिंचीनी दिव्यगर्भा वसुंधरा मानिनी,चर्मण्वती विलयीता, अनुताप लिलयिता पुण्यधारिनी। महांकाल स्वयं विराजे पावन तटपर रजनीगंधा,सान्दिपानी आश्रम में शिक्षारत रहे जहां मुकुंदामाँ हरसिद्धी के आलोक से विलसित जो आनंदकंदा,भृतुहरी, गुरु गोरक्षनाथ ने यहाँ पाया अनहद आनंदा। ओ! ऋषिवर अत्री के प्रखर तप से … Read more

अंधा कानून…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** कैसे करें हम,न्याय पर विश्वास।जब मिल रहा हो,करोड़ों का काला धनन्यायाधीश के पास॥ परिचय-डॉ. प्रताप मोहन का लेखन जगत में ‘भारतीय’ नाम है। १५ जून १९६२ को कटनी (म.प्र.)में अवतरित हुए डॉ. मोहन का वर्तमान में जिला सोलन स्थित चक्का रोड, बद्दी (हि.प्र.)में बसेरा है। आपका स्थाई पता स्थाई … Read more

कर्मफल का खेल

मानसी श्रीवास्तव ‘शिवन्या’मुम्बई (महाराष्ट्र)****************************************** जीवन है ज्योत मनुष्य का,मानवता के मूल्यों का।एक-दूसरे पर किए गएपरोपकार के लेन-देन का। इतिहास उठा कर देखते हैं तो,ज्ञान होता है कर्मों का।जिसके जैसे थे कर्म,मिला है उसे वैसा फल। अहंकारी रावण हो या,मर्यादित श्री राम हो।कौरवों का घमंड हो या,पांडवों का विश्वास हो। प्रारंभ सभी का कर्म से है,और … Read more

कहाँ मिलेगा निर्मल जल

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** जल ही जीवन, जल ही कल, जल जीवन बल,सागर से नदियों तक धारा कल कल छल-छलसंरक्षण से दूर हुए हम, दुरूपयोग है पल-पल,त्राहि-त्राहि करना होगा, कहाँ मिलेगा निर्मल जल ? जल संचय भी करना है और अपव्यय से भी डरना है,बढ़ती आबादी की खातिर, अभी बहुत कुछ करना हैबिन पानी … Read more

क्यों न फिर कविता लिखूं ?

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* सोच रही हूँक्या लिखूं ?कविता लिखूं,ग़ज़ल लिखूं। गीत लिखूं,कहानी लिखूंजो भी लिखूं,हो प्रेम से शुरू। और प्रीत पर अंत,खुशियाँ हो जिसमें अनंतन हो जिसका आदि न अंत,तेरे मेरे जीवन का मंत्र। सुबह का स्वस्थ आगाज़ लिखूं,संध्या की शुभ बेला लिखूंसूर्य के दीप्तिमान रथ पर सवार,चाँद-सितारे की रौशनी से लैस। भारत का … Read more