न जाने क्या बदला ?

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** वो बदल गए,समझ नहीं आयान जाने,क्या बदला है ? वक़्त के साथ,हर चीज बदलती हैपर तुम न बदल जाना,वक़्त के साथ। कली बदलकर,फूल बनती है।बच्चा युवा,बन जाता है। बदलना प्रगति,की निशानी हैज़िंदगी के आगे,बढ़ने की कहानी है। मौसम भी बदलता है,ख्याल भी बदलते हैंचुनाव जीतने के बाद,नेता भी बदलता … Read more

खिली चाँदनी रात

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* खिली चाँदनी रात,चंद्रमा नभ में चमके।तिथी पूर्णिमा आज,धरा भी दम दम दमके॥चारों ओर उजास,तमस को दूर भगाए।धवल रश्मियाँ खूब,सुधा जग में बरसाए॥ देख पूर्णिमा चंद्र,शान्त मन हर्षित होता।अष्ट कला परिपूर्ण,कलानिधि तम को खोता॥शोभित शिव के भाल,मान ये पाता जग में।होकर के परिपूर्ण,प्रकाशित होता नभ में॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय … Read more

नया जमाना, नया दौर

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ जो बीत गया सो बीत गया,छोड़ना होगा उस दौर कोहमें अपने-आप पर भरोसा है तो,यह नया जमाना है, नया दौर है। इसमें कहीं कोई भेदभाव नहीं है,वह मैत्री का भाव बना हुआ हैबढ़ रहा है हमारा अपना राष्ट्र,यह नया जमाना है, नया दौर है। चारों और हमने दिखा दी अपने … Read more

चलो पाठशाला, आया फिर सोमवार

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ बीत गया है रविवार,आया फिर से सोमवारहफ्तेभर की भागम-भागी,शहर हो या फिर हो गाँव की गलियाँमन में सपने लिए आँखों में मासूम चमक,आते हैं हम सब जब अपनी पाठशाला। पाठशाला जाने का उत्साह,शिक्षक-शिक्षिका साथ मिलतेबातें करते, साथ बैठ चाय की चुस्की हैं लेते,सब शिक्षक साथी आपस ही बैठ कर अपने-अपने बातें करते,बच्चे … Read more

ईर्ष्यालु मित्र

धर्मेंद्र शर्मा उपाध्यायसिरमौर (हिमाचल प्रदेश)******************************************** विक्रम एक सदाचारी, नैतिक, संस्कारी व नौजवान लड़का है। अपने आत्मसम्मान के लिए सदा लड़ता रहता है, परंतु किसी भी व्यक्ति को अपने व्यवहार से आहत नहीं करता है। आज फिर विक्रम को अपने कार्य क्षेत्र कार्यालय में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई थी। वह काफी उत्साहित है। धीरे-धीरे प्रसिद्धि और … Read more

जब साथ मिले अपनों का

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जब साथ मिले अपनों का, पथ काँटों का भी फूल बने,हाथों में जब हाथ हो अपने, सपनों के दीप हजार तले। सुर गूँजे मन के भीतर, आँसू भी फिर मुस्कान बनें,हौसलों की नाव चले जब, तूफ़ान भी आसान बनें। जब साथ मिले अपनों का, धड़कन में सौ संगीत उतरें,साया … Read more

ख़्वाब करे रोशन

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* ख़्वाब आतेबहार बनकर प्यारे,ख़्वाब करे रोशनकभी पास,कभी दूर राह सारेमानोंतब्बसुम की खिदमत,करें नभ के सितारे। कभी ख़्वाब,पलकों पे नमी हमारेनींद की दुनिया,लाए ख़्वाबसौगात प्यारे। ख़्वाब दिखाते हैंनये इरादे,जो बन जाएखुली आँखों मेंज़िंदगी की राह हमारे। मस्तिष्क के तंतुओं मेंझंकार सी हैं,मन का पंछीउड़ता है पंख पसारे। ख़्वाब कभी सचकभी झूठ … Read more

अध्यात्म की वाहक श्रीमद्भगवद्गीता

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* है दुनिया में जो व्यापक ज्ञान और अध्यात्म की वाहक,सदा जो पथ दिखाती है, बनाती नर को जो लायक।उसे कहते हैं सारे दिव्यता का इक महासागर-कहाती है जो गीता, कृष्ण थे जिसके अमर गायक॥ मुझे गीता ने सिखलाया, जिऊँ मैं कैसे यह जीवन,सुवासित कैसे कर पाऊँ, मैं अपनी देह और यह … Read more

भारत की माटी है चंदन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारत की माटी है चंदन, माथे पर तिलक लगाएंगे,दुर्लभ मानव गात्र राष्ट्र हित, बलिवेदी पर चढ़ जाएंगेस्वाभिमान भारत माटी का,कण कण हरियाली लाएंगे,मातृभूमि मंदिर विनत मन, प्रेम भक्ति शक्ति रम जाएंगे। नव विहान उत्थान प्रगति पथ, निर्माण स्वर्ग रच जाएंगे,युवा शक्ति अनुरक्ति राष्ट्र हित, सम सत्प्रेरक बन जाएँगेरामराज्य स्वप्निल … Read more

गीता गुण खान

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** गीता के गुण क्या कहूँ, गीता है गुण-खान,जीवन जीने की कला,छिपा ज्ञान-विज्ञान। छिपा ज्ञान-विज्ञान, सदा पढ़िए मन लाई,सत-रज-तम गुण ज्ञान ,सदा ही है सुखदायी। कह सरोज सुन सखा, कर्म कर लो मन लाई।फल पर वश न अपना, गुण गीता के गाई॥