आत्मनिर्भरता

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “अरे दीदी! धन्य भाग्य जो आप इधर आईं। देखो, आज आपके सिखाए हुए हुनर से हम रोजाना काफी पैसे कमा लेती हैं। मैं सूट की सिलाई करती हूँ और ये जो अनिता है ना, यह सूट के बचे हुए कपड़ों से डिज़ाइनर फ्राॅक बना देती है। आपके समझाने पर मेरे एक भाई … Read more

आत्मिक उजाले का महापर्व ‘दीपावली’

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** दीप जलें, मन महके (दीपावली विशेष)… ‘दीपावली’ केवल दीपों का ही पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मा के भीतर बसे अंधकार को मिटाने की साधना का अनुष्ठान है। यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो जन-जन के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली का उजास फैलाती है। इस उत्सव की श्रृंखला धनतेरस … Read more

सामाजिक-सांस्कृतिक धुरी है आलोक पर्व

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ दीप जलें, मन महके (दीपावली विशेष)… आलोक पर्व अंधकार से प्रकाश का पर्व है। यह पर्व-त्यौहार आशा और सकारात्मकता के साझा उत्सव में विविध पृष्ठभूमि के लोगों को एकजुट करता है। इस आलोक पर्व की जीवंत सजावट, आतिशबाजी और सामुदायिक दावतों से समाज में एकता और एकजुटता की भावना को बढ़ावा मिलता … Read more

‘धन’ को समाज की समृद्धि का माध्यम बनाएं

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** धनतेरस (१८ अक्टूबर) विशेष…. ‘धनतेरस’ का पर्व पंच दिवसीय दीपोत्सव की पवित्र श्रृंखला का आरंभिक द्वार है। यह केवल सोना-चाँदी, वस्त्र या बर्तन खरीदने का शुभ दिन नहीं, बल्कि धन के प्रति हमारी सोच को पुनर्संतुलित करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में धन को सदैव देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया … Read more

मानक और सुरक्षा उपायों की कोताही क्यों ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** २ राज्यों (राजस्थान और मध्यप्रदेश) में कफ सिरप से जुड़ी बच्चों की मौत की घटनाएं देश की दवा नियामक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यह केवल एक चिकित्सा त्रुटि या आकस्मिक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस तंत्र की विफलता का प्रतीक है जिस पर जनता अपने जीवन की रक्षा के लिए … Read more

गड़बड़झाला… ध्यान दो सरदार

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ अब तो पूरे देश में उत्सव की ज्योति प्रकाशमान होने वाली है। त्योहार व पर्व की मस्ती में नए जमाने के सुकून के पल नहीं, भागम-भाग की दौड़ है। इसलिए रेडिमेड का दौर है, सब चीजें बनी- बनाई चहिए सभी को। बुजुर्ग वर यह तमाशा देख कर मुस्काते हैं और … Read more

सीखने की जिद और जोखिम का नाम ‘अमिताभ बच्चन’

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ जन्म दिवस (१२ अक्टूबर) विशेष…. कुछ दिन पहले कहीं पढ़ा था कि अभिनेता अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया, “हर पल जीवन का, कुछ न कुछ सिखाता है, क्षमता कम ना हो सीखने की, समय यही सिखाता है।”हम सभी अपने जीवन में हर पल सीखते रहते हैं, परंतु इस बात को समझने और … Read more

जनता ‘जाति’ नहीं, ‘न्याय’ चुने, तो बिहार रचेगा इतिहास

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** बिहार में चुनावी रणभेरी बज चुकी है। मतदान की तारीखों की घोषणा के साथ ही लोकतंत्र का महायज्ञ आरंभ हो चुका है, जिसमें करोड़ों मतदाता अपने मत से राज्य की दिशा-दशा तय करेंगे। इस बार का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि विचार और व्यवस्था परिवर्तन का चुनाव है। बिहार लंबे … Read more

निर्णय

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ शिवि मल्टीनेशनल कम्पनी में काम करती थी। वह अपने बॉस रुद्र को पहली नजर में ही पसंद करने लगी थी। कॉफी के प्यालों के साथ दोनों के बीच में नजदीकियाँ बढ़ती गई। लगभग २ साल तक मिलना-जुलना, घूमना-फिरना ‘आई लव यू’ तक पहुंच गया और किन्हीं कमजोर पलों में दोनों अपना होश … Read more

जीवन की मुस्कान है मानसिक स्वास्थ्य

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ हर वर्ष हमें यह सोचने का अवसर देता है कि मनुष्य का सबसे बड़ा धन उसका मन है, और जब मन अस्वस्थ होता है तो समूचा जीवन बिखर जाता है। यह प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपात स्थितियों के दौरान लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करने … Read more