विमला

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** घड़ी पर निगाह डालते ही सुधा नाराजगी से बड़बड़ाने लगीं। आने दो विमला को, आज ही इसका हिसाब करके छुट्टी कर दूँगी। रोज को रोज डांटने से उनका ही मूड खराब हो जाता है, लेकिन इसको कोई फर्क नहीं पड़ता। वह मन ही मन भुनभुना रहीं थीं। तभी डोरबेल की आवाज हुई। उन्होंने … Read more

इंसान के गिरने का कोई वक़्त नहीं

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************** सतरंगी दुनिया-३१… एक कंजूस महिला ने अपनी वसीयत तैयार की, लिखा-मैं पुर्नजन्म में विश्वास करती हूँ, इसलिए यह वसीयत अपने नाम कर रही हूँ, ताकि मेरे द्वारा छोड़ी हुई सम्पत्ति अगले जन्म में मुझे ही मिले। बूंद-सा जीवन है इंसान का, लेकिन अहंकार सागर से भी बड़ा है। ये … Read more

भरोसा

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)********************************************** बड़े शहर की भीड़ में सावित्री नाम की एक विधवा अपने छोटे से संसार के साथ जी रही थी। उसके जीवन का एकमात्र सहारा थी उसकी ११ वर्ष की बेटी रिया। दिनभर वह घर-घर जाकर बर्तन माँजती और रात को सिलाई करती। उसके हाथों की मेहनत का एक ही सपना था कि … Read more

छोटे लोग, छोटी बातें

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************************** परिवार में जब कई सदस्य हों तो काम बढ़ ही जाता है। मुझे याद है मैं, मेरा भाई, दादी और मेरे चाचा और माँ-पापा, सब मिला कर छः लोग थे। माँ को पैरों में अक्सर दर्द हो जाता, बहुत भाग-दौड़ वाला काम नहीं कर पातीं थीं। वैसे जब तक सब घर में … Read more

भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर ‘संयुक्त परिवार’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। यह केवल एकसाथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, सहयोग, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों का सुदृढ़ आधार है। संयुक्त परिवार में दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन तथा अन्य सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं। सभी एक-दूसरे के सुख-दुःख में … Read more

एंटीबायोटिक

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** सुमित के गाल में बहुत ज्यादा दर्द था। उनको लग रहा था, शायद दाँत में कोई तकलीफ है। कुछ भी खाया नहीं जा रहा था। गाल पर बुरी तरह सूजन भी आई हुई थी और दर्द इतना कि बर्दाश्त से बाहर था। एक निजी हाॅस्पिटल में दाँत के डॉक्टर को दिखाया। उसने … Read more

बारिश बनी आफ़त

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मई १९८३ की वह रात आज भी स्मृतियों में हूबहू जीवित है। अगले दिन बी.ए. ऑनर्स की परीक्षा थी। मैं पटना के राजेन्द्रनगर स्थित रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के ऑफिसर्स क्वार्टर में ट्यूशन पढ़ाकर लौट रहा था। हाथ में रात के भोजन का टिफिन था और मन में परीक्षा … Read more

मजबूत लोकतंत्र के लिए दागी नेताओं से मुक्ति जरूरी

ललित गर्गदिल्ली********************************* भारतीय लोकतंत्र ने स्वतंत्रता के बाद अनेक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। आज भारत विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति होने के साथ-साथ विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। वर्ष २०४७ तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ देश आर्थिक, तकनीकी और वैश्विक नेतृत्व की नई ऊँचाइयों को … Read more

वह लंबे हाथ

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )********************************************** जोर-जोर से बिजली चमक रही थी, तेज बारिश हो रही थी, खिड़की का दरवाजा बार-बार अंदर बाहर होकर आवाज कर रहा था, इतने में लाइट चली गई।“मम्मी, मम्मी कहाँ हो आप ? जल्दी आकर, देखो! खिड़की के पास कोई खड़ा है। उसके लंबे हाथ मुझे पकड़ने की कोशिश कर रहे … Read more

हमारा कर्तव्य कि चिकित्सकों का सम्मान करें

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)****************************************** धरती के भगवान…. चिकित्सक (डॉक्टर) को ‘धरती का भगवान’ कहा जाता है, क्योंकि भगवान स्वयं हर स्थान पर उपस्थित नहीं हो सकते। इसलिए उन्होंने अपने प्रतिनिधि के रूप में चिकित्सक को धरती पर भेजा है। इसी कारण चिकित्सक को ‘धरती का भगवान’ कहा जाता है। सफेद कोट और गले में स्टेथोस्कोप … Read more