काश! आज हम बच्चे होते!

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************ है अबोध यह सहज बालपन,निश्छल निर्मल चित्त मधुर है।चपल प्रकृति कोमल विमल सरल,मधुर स्नेह आवृत्त नवल है। खेलकूद कौतुक हृदय सहज,भावुक मन उद्गार मधुर है।मेधावी नित अनुकरण अपर,कौतूहल आचार प्रखर है। मनमौज़ी नित बालपन निरत,लोक नीति अनजान जान है।गंगाजल पावन प्रकृति मृदुल,अधर कुसुम मुस्कान शान है। राग द्वेष मन … Read more

कवि की दुनिया

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** आबाद रही है जिनकी दुनिया ना तो कभी यह हारी है,कवि रहता है निडर खड़ा,चाहे सामने ये दुनिया सारी है। इनके शब्दों की ताकत से धन-बल सारे हार गए हैं,पानी मांगे सब उसके आगे जब कलम बनी कटारी है। इनकी ना कोई थाह जाने,पर जब जो इनको समझा है,नाराज हुआ या … Read more

जीवन और मृत्यु

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* जीना यहाँ है मरना भी यहाँ है,मर कर लेकिन जाना कहाॅ॑ हैपूछता है मृतक,मिट्टी का तन,किधर लेकर जाएगा बता मन। मिट्टी के तन रूपी पिंजरे में,तुझे सम्भाल कर रखा थातुम्हें दु:ख-दर्द कभी भी ना हो,तुम्हें,दवा-दुआ से ढका था। जैसे तेरी बिदागिरी का खत आया,मुझे धरा पे छोड़ के तू चला गयापलट … Read more

बिखरी-सी जिंदगी

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* बिखरी-सी है जिंदगी,बिखरे-बिखरे केश।देखो तो इनको जरा,सुन्दरतम् है वेश॥सुन्दरतम् है वेश,नाज-नखरे हैं करती।जब भी देखूँ रूप,हाय वो आहें भरती॥कहे ‘विनायक राज’,चंद्र-सी वो है निखरी।केश घटा घनघोर,व्योम में देखो बिखरी॥

हों कोशिशें बेहिसाब

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* सीने में जोश और बस आँखों में ख्वाब रखो,हज़ारों हों उलझनें पर कोशिश बेहिसाब रखो।रवानगी का नाम ही तो जिन्दगानी है-बस बना कर उम्मीद और हौंसला जनाब रखो॥ बुरा वक्त हमको हमारी,ताकत को बताता है,कौन अपना-कौन पराया,इसको वो जताता है।हार से भी मिलता है,अनुभव बेमिसाल-समय कठिन हमारी छिपी शक्ति दिखाता है॥ संघर्षों … Read more

मन के मनके एक सौ आठ

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* रचना का हस्ताक्षर-भाग ४ कविवर को साहित्य पढ़ने में व्यस्त देख आलोचक ने कहा,-“देखो मैं पहले समझा चुका हूँ, “जो बात एक असाधारण और निराले ढंग से शब्दों द्वारा इस तरह प्रकट की जाए कि सुनने वाले पर उसका कुछ न कुछ असर ज़रूर पड़े,उसी का नाम कविता है। आज-कल हिन्दी … Read more

अन्तिम अनुसंधान नहीं है

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ कोई अनुसंधान जगत का,अन्तिम अनुसंधान नहीं है। अनुसंधान नहीं है अन्तिम,तो है बस जीवन ही जीवनजो पा लिया उसी को पाना,बनता विषय खोज का नूतन।आदि अंत हो जिसका कोई,स्वयं यहां विग्यान नहीं है॥ मिला नहीं है कुछ भी हमको,मिलना ही मिलना है केवलमिलना ही तो वह अभाव है,जो मिल कर भी करता है … Read more

मातृ वंदना

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* मातृ वंदना प्रथम करूँ मैं,जन-जन का अभिमान है।जन्म धरा है इस माटी में,जीव जगत की शान है॥ शुभ किसान जो अन्न उपजाते,वंदन उनको कीजिए,अमर शहीदों की गाथा को,मस्तक पर नित लीजिए।लहू वतन पर यहाँ दिया है,करते शुभ गुणगान है,मातृ वंदना प्रथम करूँ मैं,जन-जन का अभिमान है…॥ मातृभूमि को शीष नवाके,किया ब्रिटिश … Read more

रोज मर जाना श़गल इनका

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रोज मरते हैं जो मय्यत भी सजा सकते हैं,कैसे ज़िन्दा हैं वही लोग बता सकते हैं, अपने मरने का जो अंदाज़ दिखा सकते हैं,राज है क्या ये वही लोग बता सकते हैं। रोज मरते हैं मगर शाम तलक फिर जिन्दा ?ये किसी पर भी वो इल्ज़ाम लगा सकते हैं। रोज मर … Read more

१८ माह ने बहुत सिखाया

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** बीते १८ महीनों में हमने मानसिक तनाव बहुत झेला है। यह मानसिक कष्ट कई कारणों से रहा जिसमें प्रमुख रहा चीन पाकिस्तान के साथ युद्ध का भय व ‘कोरोना’ महामारी,परन्तु हम सभी यह भी जानते हैं कि हमारी सरकार ने चीन व पाकिस्तान दोनों पर अपना दबदबा बनाए रखा और कोरोना … Read more