काश! आज हम बच्चे होते!
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************ है अबोध यह सहज बालपन,निश्छल निर्मल चित्त मधुर है।चपल प्रकृति कोमल विमल सरल,मधुर स्नेह आवृत्त नवल है। खेलकूद कौतुक हृदय सहज,भावुक मन उद्गार मधुर है।मेधावी नित अनुकरण अपर,कौतूहल आचार प्रखर है। मनमौज़ी नित बालपन निरत,लोक नीति अनजान जान है।गंगाजल पावन प्रकृति मृदुल,अधर कुसुम मुस्कान शान है। राग द्वेष मन … Read more