सच पूछो तनहाई है

नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)**************************************** दिल-दिमाग में जबसे दौलत,कूट-कूट कर छायी है।भीड़ भले ही आसपास है,सच पूछो तनहाई है॥ प्रतिस्पर्धा ये रेगिस्तानी,दौलत की मृगमरीचिका।तपते रिश्ते सूख रहे हैं,पता नहीं है पानी का॥प्रतिस्पर्धा को छोड़ें,बदलें,पर करे कौन अगुवाई है।भीड़ भले… ठाठ-बाट के साधन इतने,आकर्षित बाजार किये।‘सब-कुछ’ से झट घर भर लेवें,जागी आँखें स्वप्न लिये॥अहं भरा दीवानापन ये,इसकी ना … Read more

प्रेरणा

डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* जब तक साँस है…तब तक आस है,ज़िंदगी होती बस इतनी हीं ख़ास हैजी लो हर लम्हा…बना दो यादगार,बाँटो ख़ुशियाँ…कर लो सबसे प्यार। हो न कभी हैरान,ना किसी से परेशान,मुस्कुरा कर दूर भगा जीवन की उलझनेंछोड़ दे अब रूठना या किसी को मनाना,ख़ुद से ख़ुद की यहाँ कर ले बस पहचान। … Read more

महके रजनीगंधा बनकर…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** वो नैन बसी प्यारी-प्यारी,मुख सांवला-सलोना है।महके रजनीगंधा बनकर,मन का कोना-कोना है॥ तुम संग चाँद रजत रुपहली,नथ मेरे नगीने लगेपीत सूरज जुड़े पर मेरे,फूल कनेर जैसे सजे।तुम सँग हँसी के फूल झरते,तुम बिन अंसुवन रोना है।महके रजनीगंधा बनकर,मन का कोना-कोना है…॥ उपवन खिलता चारों मौसम,मन मधुकर गुन-गुन करतेतुम होते सावन ही सावन,मन भीतर … Read more

बुढ़ापा

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)***************************************** जिंदगी का सच,सुबह आईने में देखाखुद ही का चेहरा,कितना बदल चुका।मन के भाव आज जवान,चेहरे पड़ी झुर्रियों कोढांकने की कोशिश,बालों को काला करकेयुवाओं की होड़ में,शामिल होने की ललक मेंथक चुके कई इंसान।ऐसा लगता बुजुर्गी का,मानो कोई इम्तिहान होआवाज में कंपन,घुटनों में दर्दमानो सब खेल मुँहमोड़ चुके।बतियाने को रहा गया,अनुभवों का खजानाऔर … Read more

झूठ

डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’रायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************* बात करो तुम सत्य ही,झूठ कभी मत बोल।मिथ्या भाषा छोड़ तू,वाणी है अनमोल॥ सत्य झूठ में भेद अति,करलो सच पहचान।जीवन में हो सत्यता,बनो श्रेष्ठ इंसान॥ झूठा बनकर सामने,खड़ा हुआ हूँ शांत।गलत लगा आरोप है,उससे मन है क्लांत॥ चमक-दमक की होड़ में,सभी रखे अरमान।छोटी-छोटी बात पर,बना झूठ है शान॥ क्षणिक खुशी के … Read more

‘बाल आधिकार और मीडिया’ पुस्तक विमोचित

इंदौर (मप्र)। बाल अधिकार और मीडिया विषय पर लिखे विविध आलेखों के संग्रह वाली एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन मध्यप्रदेश की पर्यटन,संस्कृति और अध्यात्म मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने रविवार सुबह इंदौर में किया। इस पुस्तक का सम्पादन देवी अहिल्या विश्वविद्यालय(इंदौर) की पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला की प्रमुख डाॅ. सोनाली सिंह ने किया है। विमोचन … Read more

सफ़र

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** चलता रहता है सफर,जीवन के पल चार।प्रतिपल सोच-विचार का,दिन में बार हजार॥ सोने-जगने का सफर,करने का कुछ काम।सैर-सपाटे घूमने,छुटपुट काम तमाम॥ खाने-पीने और सब,रहत चलत हर रोज।सफर कई हैं भांत के,मिले करे ज्यों खोज॥ घड़ी दिवस पल मास का,साल सदी के पार।सफर अवधि सम ही चले,समझो करो विचार॥ सफर पूर्ण कब … Read more

प्रकाशोत्सव पर्व

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************************* दीप जलाएँ आज हम,पावन पर्व प्रकाश।ननकाना पावन धरा,नानक ज्ञानाकाश॥ कहूँ सन्त,फक्कड़ पथिक,दीन दुखी सरताज।अवतारी मानव जगत,प्रीति नीति आवाज़॥ संन्यासी निर्मोह जग,कर कुटुम्ब परित्याग।विविध रूप अनुभूत जन,नानक गुरु अनुराग॥ अवसीदित जनत्रासदी,व्याकुल नानक चित्त।लोभ स्वार्थ मिथ्या कपट,यवनत्रास आवृत्त॥ देख धर्म की हानि जब,मानवता का ह्रास।विकल हृदय नानक चला,बना प्रकाश नवास॥ उद्दोलक … Read more

विकास की रीढ़ महिला

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** विकास की रीढ़ है महिला,प्रगति की राह है महिलाआर्थिक विकास की धुरी है महिला,फिर इतनी तकरार क्यों,होता इतना अत्याचार क्यों ?यह हमें समझना होगा,उत्तम राह बनानी होगीसशक्तिकरण पर बात अब जरूरी है,उन्नत भाव संग उद्यम खूब जरूरी है।सामाजिक,आर्थिक,राजनीतिक और फिर,सांस्कृतिक सहभागिताएक सुन्दर अपूर्व शुरुआत है,उन्नति प्रगति और विकास यात्रा मेंमहिला सशक्तिकरण का अब,दिखता जरूरी … Read more

तुम भी भाग चले

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ आँसुओं! तुम कैसे निकले!आई व्यथा बसी अन्तर में,भगदड़ मची हृदय मेंभागे अन्तरवासी ऐसे,जैसे जीव प्रलय मेंओह! सभी उर के शुभ चिन्तक,साथी गये छले। भाग गया विश्वास अधम वह,भागी आशा चंचलभागा प्रिय आनन्द अगोचर,भागा सब सुख निर्बलतज सब अपना चले निकेतन,जिसमें रहे पले। जब इस जीवन में मधु ऋतु थी,तुम भी थे मानस मेंतब … Read more