ख्वाब हम भी सजा लें

अरशद रसूलबदायूं (उत्तरप्रदेश)****************************************** हरिक बदगुमानी को दिल से निकालें,हमें तुम संभालो,तुम्हें हम संभालें। यह जीवन बिखरने लगा है अभी से,नज़र एक-दूजे की जानिब घुमा लें। अगर ग़म को बदनाम करना नहीं है,चलो बंद कमरे में आँसू बहा लें। कभी दरमियां तुम किसी को न लाना,हमें तुम मना लो,तुम्हें हम मना लें। यहां कोई अपना हितैषी … Read more

भूख की तपिश…

एम.एल. नत्थानीरायपुर(छत्तीसगढ़)*************************************** भूख से कुलबुलाते पेट में निष्ठुर खाली थपेड़े हैं,पीठ से चिपके तन पर गरीबी के पैबंद जकड़े हैं। भूख की लाचारी में दर्द छिपाए किसे जानता है,निर्धन व्यक्ति प्रार्थना के सहारे जीवन काटता है। खाली पेट की आवाजें विवशता कहा करती है,शून्य में निहारती आँखें सब-कुछ बयां करती है। रेत पर जलती आग … Read more

इच्छाएँ

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)***************************************** बर्फ का गोला,रसीला रंग-बिरंगादोनों मुँह में रखते ही,घुल जातेजैसे माँ का स्नेह,घुल जाता बच्चों में।बढ़ती उम्र में,पोपले मुँह सेइन्हें ला कर देने का,कह नहीं पातीसोचती,लोग क्या कहेंगे।मगर हम तो भेड़ चाल में,लग जाते हैं कतार मेंइन्हें खाने की चाहत में,बच्चों के संग बन जाते हैं बच्चे।बढ्ढी माँ को पूछते नहीं,उसकी इच्छा क्या … Read more

कभी आए क्यों नहीं…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** जहर ही सही पिलाया क्यों नहीं,दस्तूरे जहाँ निभाया क्यों नहींसौगात तो कोई नहीं मांगी,थोड़ा-सा प्यार लाए क्यों नहीं। मेरा ठिकाना माना तुम हो,अपना पता बताया क्यों नहीं,बेकरारी की जाने दो ना पूछो,खामोशी से ही बुलाया क्यों नहीं। बहुत सुना था तुम सघन छाँव हो,बताओ इधर छाए क्यों नहींबादल बन गुजरते रहे आसमाँ,छाँव … Read more

मन के मनके एक सौ आठ

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* भाग १ इस लेख को रचने के लिए प्रसिद्ध साहित्यकारों की कृतियों की सहायता ली गई है,और उनके वक्तव्यों को ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है,जो एक पात्र के रूप में चरित्र-चित्रण करते हैं। विद्यार्थी,शोधार्थी व शौक या अपनी रुचि के लिए नए रचनाकार कुछेक विधाओं में लिखने के लिए … Read more

वाणी वीणा की

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** टूटा कभी,जब वाणी का तार।लेकर जा पहुंचा,मैं टूटी सितार।साज-सितार काया संगीत का वह।खोल कर बैठा,जो वीणा तार-तार।कुछ कही-अनकही,बातें थी मेरी।कुछ रटी-रटाई,बातें थी उसकी।एक की तीन और,तीन की पांच।ना जाने,कितना झूठ उड़ाताया जाने थी,बातों में सांच की आंच।सोचूं कि समझूँ,समझूँ तो जानूं।बातों ही बातों में,जो वो कहे वही मानूं।शक-शुभाहकि क्या … Read more

मैं भी पढ़ने जाऊंगी

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** पापा मुझे भी किताब दिलवा दो,मैं भी अब विद्यालय पढ़ने जाऊंगीभैया संग मेरा भी नामांकन करवा दो,मैं भी पढ़-लिख सितारा बन जाऊंगी। मुझे मत समझना बोझ अपना,पढ़-लिख मैं तो देश चलाऊंगीमुझे होगा अभिमान आप पर,मैं तो दुनिया को तार जाऊंगी। सुनो पापा,सुनो मम्मी,सुनो सुनो,मेरे लिए भी तो कुछ सपने बुनोशीशे … Read more

वीरों ने दिखाया शौर्य

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** कभी संतूर जैसी धुन निकलती क्या नगाड़ों में।नहीं बादाम-सी ताकत कभी मिलती सिंघाड़ों में। बिना हथियार वीरों ने दिखाये शौर्य के करतब,चबा डाले चवालिस चीन के सैनिक जवाड़ों में। नदी आवाज खो बैठी सुरीली जल तरंगों की,भयानक नाद था उस वक्त शेरों की दहाड़ों में। छुपे थे युद्ध के एलान चीनी … Read more

मप्र में आदिवासी मतों की राजनीतिक रस्साकशी..!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** यह संभवत: पहली बार है, जब देश की सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में आदिवासियों को लुभाने के लिए इस कदर राजनीतिक खींचतान मची है। जहां सत्तारूढ़ भाजपा आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मना रही है,जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सम्बोधित किया,वहीं विपक्षी … Read more

जीवन की बन गई कहानी

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ गीत बनाने बैठी थी पर,जीवन की बन गई कहानी।नीरव गगन गुंजाना था रे,अभिनव किसी गीत के स्वर सेलाना था बसन्त पृथ्वी पर,नवल कल्पनाओं के घर से।कुहू- कुहू कर गाना था पर,गा बैठी चातक की वाणी। ऊँची लहर उठाना थी नव,अविरल अपने मानस सर सेजिसे भरा था मैंने अपनी,सबल लालसा की गागर से।नूतन रीति … Read more