ख्वाब हम भी सजा लें
अरशद रसूलबदायूं (उत्तरप्रदेश)****************************************** हरिक बदगुमानी को दिल से निकालें,हमें तुम संभालो,तुम्हें हम संभालें। यह जीवन बिखरने लगा है अभी से,नज़र एक-दूजे की जानिब घुमा लें। अगर ग़म को बदनाम करना नहीं है,चलो बंद कमरे में आँसू बहा लें। कभी दरमियां तुम किसी को न लाना,हमें तुम मना लो,तुम्हें हम मना लें। यहां कोई अपना हितैषी … Read more