जातिगत आरक्षण का खेल घातक

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** आज जहां देश को ‘सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास’ वाली राजनीतिक व्यवस्था की महती आवश्यकता है,एवं जाति,पंथ,मजहब आधारित चली आ रही पद्धति के खात्मे की जरूरत है,वहीं जातिगत आरक्षण का खेल निश्चित ही देश के लिए घातक है। ऐसी स्थिति में पिछड़ा वर्ग को इसकी गंभीरता को समझना होगा। ये संख्या,ज्ञान,बुद्धि,धन,देशभक्ति,बाहुबल … Read more

सोच समय की

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** ऐ मन…,सोच फिर ऐसीक्यों सोचे,जो संभावनाओं से परे है।सोच कर ही जिसको,न जाने क्यों…?हर मन,मन ही मन डरे है।सुख के आँचल में,दु:ख की प्रतिछाया काही सारा कारण है।ऐसी सोच से,तेरी बेचैनी भी तोबिना कोई,सही कारण है।कुत्सित संभावनाओंको हमेशा कुरेदना,कहाँ अच्छा होता है ?सुख के आँचल मेंही तो मुँह ढक … Read more

खत…इंतजार

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** क्या होते थे उस समय के,खत हमारे और तुम्हारे लिएपर समय परिवर्तन ने किया,कुछ इस तरह का खेलबंद होने लगा पत्रों को,लिखने का वो दौरक्योंकि आ गए हैं अब,संचार के नए उपकरणजिसके कारण स्नेह-प्रेमभाव,और आत्मीयता मिट रही है। क्या दौर हुआ करता था,जब दिल की बातें कहनेसुख-दु:ख और बातें बताने के लिए,हाथ … Read more

वीरों की वीर निराली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************** थी वीरों की वीर निराली,वह रानी मतवाली थी।जिसका साहस,शौर्य प्रखर था,संग भवानी-काली थी॥उस झाँसी की सेनानी की,सारे ही जय बोलो।बंद पड़े जो इतिहासों में,उन पन्नों को खोलो॥ वीर बुँदेलों की माटी ने,बलिदानों को पोसा।बैरी का सिर काट दिया,यदि किंचित उसने कोसा॥बुन्देलों की थाती ने तो,जय का घोष निभाया।दुश्मन को चटवाई … Read more

समस्या को समझें,सुलझाने का सार्थक प्रयास करें राजनेता

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** देश के निर्माण के लिए राजनेताओं का सकारात्मक योगदान होना चाहिए। आजकल हम देखते हैं कि ज्यादातर राजनेता स्वार्थी हैं। केवल अपना उल्लू सीधा करते हैं। जब चुनाव होते हैं तो घर-घर जाकर लोगों से गले मिलते हैं। बड़े-बड़े वादे करते हैं,घड़ियाली आँसू बहाते हैं,पर चुनाव जीत जाने के बाद फिर उनके … Read more

शुभ कल्याण लिखें

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* श्रेष्ठ सृजन कर जीवन पथ पर,सुंदर शुभ कल्याण लिखें।दीन-दुखी जन जो सम्मुख हो,प्रतिक्षण अनुपम त्राण लिखें॥ नारी के सम्मान की रक्षा,मनुज हृदय समाया हो,समभावों के अनुपालन से,बेटी हृदय हर्षाया हो।कुटिल दृष्टि का नाश सदा हो,श्रेष्ठ देश निर्माण लिखें,श्रेष्ठ सृजन कर जीवन पथ पर,सुंदर शुभ कल्याण लिखें॥ समता से पाटें मिलजुल कर,जात-पात … Read more

स्वार्थ से विरत होकर ही सुखमय जीवन की कल्पना संभव

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************** आज के भौतिकवादी जिजीविषा के दलदल में फंसी भागम-भाग की जिंदगी में एक यह यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा है कि ‘पारिवारिक जीवन कैसे सुखमय हो ?’परिवार का अर्थ वह गोवर्धन पर्वत सम छत्र है जिसमें सभी परस्पर प्रेम,सौहार्द,सहयोग,सुख-दुःख के साथी,सहानुभूति,सहनशीलता,और संवेदनशील और एक-दूसरे की चहुँमुखी प्रगति,विकास,उत्थान और अनवरत संघर्ष … Read more

अनकही दास्तान

मंजू भारद्वाजहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************* फलक पर सज रहा कहीं कोई साज है,कुदरत के साए में दफन उसके कई राज हैं। खामोश पर्वत भी अक्सर गुनगुनाता है,अनजाने-अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठाता है। कहता है अक्सर सुनो ऐ धरती-ऐ आसमान,अनकही गुत्थियों में उलझा है तेरा जहान, जीना हो तो पत्थर बनकर जियो,फूलों की कोई जिंदगी होती नहीं। आंधी-तूफान हो … Read more

समन्दर की तरंगें

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* शुभ्र जल-बिन्दु,मानो तारों की लड़ीसमन्दर की प्यास बुझाने,लगा दी बिन्दुओं ने झड़ी। रूई के बादलों-सा दृश्यमान,स्वच्छ स्फटिक-सा जलगौरवर्ण सुन्दरियों का मानो,भिगोता तन और मन। उज्ज्वल मणियों से जड़ित,समन्दर की प्रत्येक तरंग।मधुर नाद से निनादित,मानो शहनाई और मृदंग॥ परिचय–उत्तराखण्ड के जिले ऊधम सिंह नगर में डॉ. पूनम अरोरा स्थाई रुप से … Read more

रुत सुहानी आ गयी

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचनाशिल्प:क़ाफ़िया-आनी/ रदीफ- आ गयी बहर २१२२,२१२२,२१२२,२१२ भाप दरिया से उठी अरु बन के पानी आ गयी,बूँद बारिश की धरा पे बन के रानी आ गयी। लहलहाये खेत पोखर ताल सारे भर गये,सूखते तरु पल्लवों पर‌ फिर जवानी आ गयी। मन उमंगों से भरा मौसम सुहाना देख कर,मास सावन में छमक कर … Read more